मैंगो मैन की विशेष सलाह: बारिश के पहले अपनाएं ये तरीके, आम की बागवानी में मिलेगी बंपर पैदावार बिहार 2 महीने पहले 75
आम की तुड़ाई के बाद अक्सर किसान बगीचे की देखरेख करना बंद कर देते हैं, जिससे अगली फसल प्रभावित होती है। मैंगो मैन अशोक चौधरी ने बारिश से पहले बागों के प्रबंधन और खाद के सही इस्तेमाल का तरीका बताया है।

आम की तुड़ाई के बाद की लापरवाही है मुख्य समस्या

अक्सर देखा गया है कि आम के किसान फल तुड़ाई के बाद अपने बगीचों को उपेक्षित छोड़ देते हैं। कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यही वह सबसे बड़ी चूक है, जो अगले सीजन में पेड़ों पर कम फलों के आने का मुख्य कारण बनती है। भागलपुर के प्रसिद्ध मैंगो मैन अशोक चौधरी ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि यदि किसान अभी से अपने बागों के प्रबंधन पर ध्यान देना शुरू कर दें, तो उन्हें अगले साल आम की बंपर पैदावार मिल सकती है। बागवानी को केवल फल तोड़ने तक सीमित न रखें, बल्कि उसे एक निरंतर प्रक्रिया मानें ताकि पेड़ों का स्वास्थ्य बना रहे।

बारिश से पहले करें ये जरूरी प्रबंधन

अशोक चौधरी का कहना है कि आम की फसल उतारने के बाद बगीचे की सुध लेना अनिवार्य है। मानसून की बारिश शुरू होने से पहले पूरे बगीचे की गहरी जुताई करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके साथ ही पेड़ों की जड़ों के पास हल्की खुदाई करना चाहिए ताकि मिट्टी में हवा का संचार बना रहे। पौधों को पोषण देने के लिए सरसों की खली सबसे उत्तम मानी जाती है। उन्होंने मात्रा के बारे में स्पष्ट किया कि प्रति पेड़ 1 किलो सरसों की खली पर्याप्त होती है, लेकिन यदि पेड़ का आकार काफी बड़ा है, तो उसे 2 किलो तक सरसों की खली दी जा सकती है।

सरसों की खली का सही प्रयोग

सरसों की खली सीधे जड़ों में डालना गलत तरीका है। अशोक चौधरी ने विशेष रूप से सलाह दी है कि खली को इस्तेमाल करने से पहले उसे पानी में भिगोना बेहद जरूरी है। इसे कम से कम 4 दिनों तक पानी में फूलने दें। जब यह अच्छी तरह गल जाए, उसके बाद ही इसे पेड़ों की जड़ों के पास डालें। खाद के साथ-साथ कीटनाशकों का प्रयोग करना भी न भूलें। उचित मात्रा में कीटनाशक का उपयोग पेड़ों की जड़ों को कीड़ों के हमले और मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से सुरक्षित रखता है। इससे पेड़ न केवल स्वस्थ बने रहते हैं, बल्कि आगामी मौसम में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण फल भी देते हैं।

भागलपुर की जलवायु और आम की किस्में

भागलपुर क्षेत्र की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां आम की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। अशोक चौधरी के अनुसार, यहाँ किसान कई किस्मों का चुनाव कर सकते हैं, जिनमें से जर्दालु, आम्रपाली, दूधिया मालदा और हेमसागर सबसे अधिक लाभ देने वाली मानी गई हैं। बाजार में इन किस्मों की मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को अपना माल बेचने में कठिनाई नहीं होती और वे अधिक मुनाफा कमाने में सफल होते हैं।

नया बाग लगाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

यदि आप नया आम का बाग स्थापित करने की सोच रहे हैं, तो मिट्टी का वैज्ञानिक परीक्षण सबसे पहला कदम होना चाहिए। मिट्टी की जांच के बाद यदि उसमें किन्हीं तत्वों की कमी है, तो उचित उपचार जरूर कराएं। अच्छी तरह तैयार की गई मिट्टी में लगाए गए पौधे न केवल तेजी से बढ़ते हैं, बल्कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही योजना और समय पर की गई देखभाल से आम के बाग को हर साल एक लाभदायक उद्यम बनाया जा सकता है। सही प्रबंधन ही किसानों की आय बढ़ाने का एकमात्र टिकाऊ तरीका है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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