कान्हा टाइगर रिजर्व में मानसून की दस्तक: 1 जुलाई से पर्यटकों के लिए दरवाजे बंद, सुरक्षा के लिए तैयार 1000 सुरक्षाकर्मी मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 73
मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में मानसून सीजन के कारण कोर एरिया को 30 सितंबर तक बंद कर दिया गया है। वन्यजीवों की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए वन विभाग ने 17 हाथियों और 1000 कर्मियों के साथ ऑपरेशन मानसून का आगाज किया है।

मानसून के चलते पर्यटकों की एंट्री पर रोक

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व ने मानसून सीजन के मद्देनजर अपने कोर एरिया को पर्यटकों के लिए बंद करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यह प्रतिबंध 1 जुलाई से प्रभावी हो गया है और पर्यटकों के लिए 30 सितंबर तक बहाल रहेगा। वन प्रबंधन के अनुसार, इस दौरान सैलानी केवल बफर जोन का ही लुत्फ उठा सकेंगे। बारिश के दिनों में जंगल के संवेदनशील कोर एरिया में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन ने ऑपरेशन मानसून नाम से एक विशेष सुरक्षा अभियान शुरू किया है।

क्यों जरूरी है ऑपरेशन मानसून?

मानसून के दौरान घने जंगलों में आवागमन के रास्ते और सड़कें दुर्गम हो जाती हैं। ऐसे समय में अवैध शिकार और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों की संभावना बढ़ जाती है। इसे देखते हुए कान्हा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। इस ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य वन्यजीवों की सुरक्षा को अभेद्य बनाना और जंगल के हर कोने पर पैनी नजर रखना है, ताकि पारिस्थितिक तंत्र में किसी भी प्रकार का व्यवधान न आए।

182 कैंप और 1000 जवानों की तैनाती

जंगल की सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैनाती की है। कान्हा के 940 वर्ग किमी के कोर एरिया में 120 कैंप काम कर रहे हैं। इसके अलावा 1134 वर्ग किमी के बफर क्षेत्र में 50 कैंप और 110 वर्ग किमी के फेन अभयारण्य में 12 पेट्रोलिंग कैंप स्थापित किए गए हैं। इस प्रकार कुल 182 कैंपों के माध्यम से पूरे रिजर्व की निगरानी की जा रही है। सुरक्षा के इस महाअभियान में लगभग 1,000 अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं, जो दिन-रात मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।

हाथियों का सहारा और पैदल गश्त

सुरक्षा के लिए रिजर्व के 589 संवेदनशील इलाकों को 38 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। यहाँ सुरक्षा बल 1,204 किलोमीटर लंबी 160 पगडंडियों पर लगातार पैदल गश्त कर रहे हैं। जिन पहाड़ी और दुर्गम रास्तों पर इंसानों का पहुंचना कठिन है, वहां 17 विभागीय हाथियों को तैनात किया गया है। कान्हा, किसली, मुक्की और सूपखार के हाथी कैंपों से इन हाथियों की मदद ली जा रही है, जो घने जंगलों में निगरानी का मुख्य जरिया बने हुए हैं।

अधिकारियों को सख्त निर्देश

कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र के सहायक संचालक आशीष पाण्डेय ने बताया कि अभियान की नियमित निगरानी की जा रही है। सभी परिक्षेत्र अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कैंपों में ही रुकें और हर दिन गश्त की रिपोर्ट प्रबंधन तक पहुंचाएं। इसके साथ ही, दुर्गम परिस्थितियों में काम कर रहे सुरक्षाकर्मियों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जाएंगे ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से सतर्क रहकर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर सकें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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