मंदिर में दीपक जलाने के सही नियम और विधि, जानें क्या कहती है मान्यता धर्म 2 महीने पहले 100
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाना अनिवार्य माना गया है. जानिए घर के मंदिर में दीपक जलाते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए और इसका सही समय क्या है.

दीपक जलाने का महत्व

हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की आराधना के दौरान दीपक प्रज्वलित करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यता है कि दीपक के बिना पूजा अधूरी होती है. दीपक को सकारात्मकता का प्रतीक और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाला माना जाता है. हालांकि, शास्त्र सम्मत फल प्राप्त करने के लिए दीपक जलाने के कुछ विशिष्ट नियमों का पालन करना आवश्यक है.

पूजा में दीपक जलाने का सही समय

सामान्यतः पूजा के समय दिन में दो बार दीपक जलाना शुभ माना जाता है. पहला समय सूर्योदय के दौरान और दूसरा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद का होता है. प्रातःकाल 5 बजे से 7 बजे के बीच और शाम को 5:30 बजे से 7:30 बजे के बीच दीपक जलाना चाहिए. शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक रखना विशेष फलदायी होता है, क्योंकि माना जाता है कि इस समय माता लक्ष्मी का आगमन होता है.

दीपक जलाने की विधि

  • मिट्टी, पीतल या तांबे के दीपक का उपयोग करें. यदि मिट्टी का दीपक प्रयोग कर रहे हैं, तो उसे पहले पानी में भिगोकर अच्छी तरह सुखा लें, ताकि वह तेल या घी कम सोखे.
  • घी के दीपक में रुई की गोल बाती और तेल के दीपक में लंबी बाती का प्रयोग करना चाहिए.
  • तेल का दीपक भगवान के बाईं ओर और घी का दीपक दाईं ओर रखना शुभ होता है.
  • दीपक की लौ का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. पूर्व दिशा की ओर लौ रखने से आयु और उत्तर दिशा की ओर रखने से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है. दक्षिण दिशा में दीपक केवल पितरों या यमराज के निमित्त जलाया जाता है.

रखें इन बातों का खास ध्यान

दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि वह कहीं से भी खंडित या टूटा हुआ न हो, क्योंकि खंडित दीपक नकारात्मकता और दरिद्रता को आमंत्रित करता है. दीपक को सीधे जमीन पर न रखकर हमेशा एक प्लेट या आसन पर रखें. दीपक को कभी भी दूसरे जलते हुए दीपक से न जलाएं, हमेशा माचिस का ही प्रयोग करें. इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि पूजा के दौरान दीपक बीच में न बुझे, इसलिए उसमें पर्याप्त मात्रा में घी या तेल का उपयोग करें. पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है: शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा, शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते.

मीरा शर्मा पाबना की धर्म एवं संस्कृति लेखिका हैं, जो त्योहार, धर्म, ज्योतिष और परंपराओं पर लिखती हैं। व्रत-त्योहारों के महत्व, पूजा विधि और आस्था से जुड़े विषयों को वे श्रद्धा और जानकारी के साथ पेश करती हैं। वाराणसी से उनका जुड़ाव उनके लेखन में झलकता है।

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