हिमाचल प्रदेश
2 घंटे पहले
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विचारों
एक दौर था जब लोग अपनी चिट्ठियां और जरूरी संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने के लिए कबूतरों का सहारा लेते थे। समय बदला तो इनकी जगह डाकियों और गाड़ियों ने ले ली। अब डिजिटल युग में डाक विभाग ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने सबको चौंका दिया है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में अब विभाग का नया साथी एक ‘इलेक्ट्रॉनिक कबूतर’ यानी आधुनिक ड्रोन बन गया है।
पहाड़ी और दुर्गम इलाकों तक डाक पहुंचाने का काम अब बेहद आसान और हाई-टेक हो गया है। डाक विभाग ने मंडी से द्रंग विधानसभा क्षेत्र की रेहड़धार शाखा तक आधुनिक ड्रोन डाक सेवा का सफल शुभारंभ किया है। स्काई एयर कंपनी के सहयोग से शुरू हुए इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत जो डाक पहाड़ी रास्तों से पहुंचने में पूरा दिन ले लेती थी, उसे ड्रोन ने महज 6 से 7 मिनट में पहुंचाकर एक नया इतिहास रच दिया।
पहली उड़ान: मंडी हेड ऑफिस से रेहड़धार शाखा तक
पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत मंडी में ड्रोन आधारित मेल और पार्सल डिलीवरी सेवा का विधिवत और सफल आगाज किया गया। डाक विभाग के हेड ऑफिस मंडी से द्रंग विधानसभा क्षेत्र की दुर्गम रेहड़धार शाखा के बीच पहली ड्रोन डाक भेजी गई। हवाई मार्ग से करीब 5 से 6 किलोमीटर की एकतरफा दूरी तय करते हुए इस ड्रोन ने घंटों का काम मिनटों में पूरा कर दिखाया।
डाक विभाग प्रधान कार्यालय के डिप्टी सुपरिटेंडेंट संजय कुमार ने बताया कि इस पहाड़ी और कठिन भौगोलिक क्षेत्र में पहले अकाउंट्स ब्रांच से सामान्य तरीके से डाक पहुंचाने में पूरा एक दिन लग जाता था। लेकिन स्काई एयर कंपनी के ड्रोन के माध्यम से यह डाक केवल 6 से 7 मिनट में रेहड़धार पहुंचा दी गई। वहां से दिनभर की डाक वापस मंडी भी लाई गई।
10 किलो वजन उठाने में सक्षम
स्काई एयर कंपनी के कर्मचारी सुभाष दुबे ने ड्रोन की क्षमता और तकनीकी खूबियों का ब्यौरा साझा किया। उन्होंने बताया कि डाक सेवा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा यह विशेष ड्रोन 10 किलोग्राम तक का भारी पार्सल उठाने में पूरी तरह सक्षम है। हवाई मार्ग पर यह ड्रोन एक बार में 30 से 50 किलोमीटर की लंबी दूरी आसानी से तय कर सकता है। रीयल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा से लैस होने के कारण इसकी लाइव मॉनिटरिंग संभव है कि डाक इस समय आसमान में कहां है।
10 दुर्गम क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
मंडी की डाकपाल नेहा संख्यान ने बताया कि पूरे भारत में लगभग 150 चुनिंदा स्थानों पर स्काई एयर कंपनी के माध्यम से यह आधुनिक सुविधा दी जा रही है। मंडी जिले की बात करें तो शुरुआती चरण में जिले के 10 सबसे कठिन और दुर्गम स्थानों को इस सेवा के लिए चुना गया है, जहां कंपनी द्वारा 8 अत्याधुनिक ड्रोन के जरिये नियमित डाक सुविधा दी जा रही है। इससे सुदूर बर्फीले और पहाड़ी गांवों में रहने वाले लोगों को मनीऑर्डर, दवाइयां और जरूरी दस्तावेज तुरंत मिल सकेंगे।
प्रधानमंत्री के विजन का परिणाम
पर्यावरण के अनुकूल और क्रांतिकारी इस पहल को लेकर डाक विभाग के उच्च अधिकारियों ने प्रसन्नता जताई है। यह पूरी योजना सीधे तौर पर उन संवादों और फीडबैक का नतीजा है, जो विभाग के आला अधिकारियों ने ग्रामीण डाक सेवकों और पोस्टल असिस्टेंट्स के साथ बातचीत के दौरान जुटाए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप, डाक विभाग अब देश के सबसे सुदूर और अंतिम छोर पर बैठे नागरिक को आधुनिक तकनीक के माध्यम से तीव्र विकास और अवसरों की मुख्यधारा से जोड़ने में जुट गया है।
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