बद्रीनाथ मंदिर दान चोरी मामला: व्हिसलब्लोअर संदीप खत्री को पुलिस ने दफ्तर में किया नजरबंद, एसआईटी जांच की उठाई मांग भारत 3 महीने पहले 123
बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की चोरी का पर्दाफाश करने वाले भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री को पुलिस ने करीब ढाई घंटे तक नजरबंद रखा। संदीप ने मामले की जांच एसआईटी या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की मांग की है।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध धाम बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी का बड़ा खुलासा करने वाले भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री को पुलिस द्वारा नजरबंद किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस ने संदीप खत्री को उनके कार्यालय में लगभग ढाई घंटे तक नजरबंद रखा। संदीप खत्री ने बताया कि बुधवार को वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस संबंध में एक मांग पत्र यानी ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, इससे पहले ही पुलिस उनके दफ्तर पहुंच गई और उन्हें सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक बाहर नहीं निकलने दिया। इसके बाद पुलिस ने उनके ज्ञापन को लेने के लिए खुद तहसीलदार को उनके कार्यालय में बुलाया, जहां उन्होंने अपना पत्र प्रशासन को सौंपा।

पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल, मानसिक प्रताड़ना का लगाया आरोप

इस पूरे घटनाक्रम पर रोष व्यक्त करते हुए भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री ने कहा कि यह पुलिस की ओर से उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने की एक कोशिश है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी एक रात पुलिस उनके घर पर लगभग 1 घंटे तक रुकी रही थी। संदीप का कहना है कि बद्रीनाथ धाम जैसे पवित्र स्थल पर हो रही चोरी के संवेदनशील मामले को उजागर करने के कारण ही पुलिस उन्हें इस तरह परेशान कर रही है। उनका मानना है कि पुलिस प्रशासन द्वारा उनके घर और दफ्तर पर इस प्रकार की कार्रवाई करना पूरी तरह से अनुचित है।

उच्च स्तरीय कमेटी की जगह एसआईटी और न्यायिक जांच की मांग

संदीप खत्री ने सरकार द्वारा इस मामले की जांच के लिए गठित की गई उच्च स्तरीय जांच कमेटी पर भी असंतोष जाहिर किया है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बद्रीनाथ मंदिर में हुए इस दान-चढ़ावे की चोरी के प्रकरण की गहराई से जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए, जो चाहें उच्च न्यायालय के हों या फिर उच्चतम न्यायालय के। उनका कहना है कि इतनी बड़ी अनियमितता की निष्पक्ष जांच केवल स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही संभव है।

राम मंदिर विवाद के बाद देशभर में उठे सवाल

गौरतलब है कि अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भी पूर्व में चढ़ावे की चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया था, जिसके बाद पूरे देश में भारी हंगामा खड़ा हो गया था। राम मंदिर के इस प्रकरण के सामने आने के बाद देश के तमाम प्रमुख और ऐतिहासिक मंदिरों में मिलने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। अयोध्या मामले में गहन SIT जांच की गई थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था और उनके पास से चोरी की गई राशि भी बरामद की थी। उस बड़े विवाद के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

चूंकि राम मंदिर से देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और भावनाएं जुड़ी हुई हैं, इसलिए इस घटना के बाद से ही लोग देश के अन्य सभी प्रमुख मंदिरों में भी पारदर्शी और बेहतर प्रबंधन की जोरदार मांग उठा रहे हैं। इसी कड़ी में बद्रीनाथ मंदिर में दान चोरी का मामला सामने आने और उस पर संदीप खत्री के बयानों ने उत्तराखंड सहित पूरे देश के धार्मिक हल्कों में हलचल तेज कर दी है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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