धर्म
7 घंटे पहले
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विचारों
मुख्य द्वार और वास्तु का गहरा संबंध
वास्तु शास्त्र में घर के हर छोटे से छोटे हिस्से का अपना विशेष महत्व बताया गया है, चाहे वह रसोई हो, मंदिर हो या फर्नीचर की दिशा। अक्सर हम घर के मुख्य द्वार पर रखे पायदान को बेहद मामूली समझते हैं, लेकिन वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक इसका सीधा असर हमारे घर की सुख-शांति और समृद्धि पर पड़ता है। घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा दोनों का प्रवेश होता है। इसलिए, द्वार पर रखी किसी भी वस्तु का वास्तु के अनुसार होना अत्यंत आवश्यक है।
कैसा होना चाहिए पायदान
बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य का कहना है कि घर के बाहर बिछाया गया पायदान हमेशा साफ-सुथरा और पूरी तरह समतल होना चाहिए। यदि पायदान पुराना, फटा हुआ या गंदा है, तो यह घर में वास्तु दोष उत्पन्न करता है। फटा हुआ पायदान घर में कलह, आपसी मनमुटाव और आर्थिक तंगी का मुख्य कारण बन सकता है। इसलिए नियमित रूप से इसकी सफाई पर ध्यान देना जरूरी है।
दिशा के अनुसार चुनें सही रंग
वास्तु शास्त्र में घर की दिशा को ध्यान में रखते हुए पायदान के रंग का चुनाव करना शुभ माना जाता है:
- यदि आपका घर पूर्व मुखी है, तो आपको पीले या सफेद रंग का पायदान उपयोग करना चाहिए।
- जिनका घर उत्तर मुखी है, उनके लिए हरे या नीले रंग का पायदान रखना सबसे अच्छा माना गया है।
नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का उपाय
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य एक विशेष उपाय साझा करते हैं, जिससे घर के वास्तु दोष कम हो सकते हैं। आप साबुत खड़े नमक को एक छोटे कपड़े में बांधकर उसे पायदान के नीचे रख सकते हैं। यह उपाय घर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को द्वार पर ही रोकने में मदद करता है, जिससे घर का वातावरण सकारात्मक बनता है और देवी लक्ष्मी का आगमन सुनिश्चित होता है।
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