महोबा में 9 साल के बच्चे को सांप ने डसा, मां की सूझबूझ से बची जान उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 62
उत्तर प्रदेश के महोबा में एक बच्चे को सांप ने काट लिया, लेकिन मां ने झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने के बजाय सांप को डिब्बे में कैद किया और अस्पताल ले गई, जिससे उसकी जान बच गई।

सांप को डिब्बे में बंद कर अस्पताल पहुंची मां

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक बड़ी मिसाल पेश करती है। महोबा सदर तहसील के अंतर्गत आने वाले करहरा कलां गांव में एक 9 वर्षीय बालक की जान उसकी मां के सही समय पर लिए गए एक साहसी फैसले के कारण बच गई। घर के बाहर खेल रहे बच्चे को सांप ने अपना शिकार बनाया, लेकिन परिवार की सतर्कता ने मौत को मात दे दी।

लकड़ियों के पीछे छिपा था सांप

घटना के अनुसार, बबलू का बेटा यश अपने घर के दरवाजे पर खेल रहा था। इसी दौरान घर में रखी लकड़ियों के पीछे छिपे हुए एक सांप ने यश के पैर पर काट लिया। बालक के अचानक चिल्लाने की आवाज सुनकर उसकी मां राजकुमारी और परिवार के अन्य सदस्य फौरन दौड़कर बाहर आए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने घबराने के बजाय तत्काल एक व्यावहारिक निर्णय लिया। उन्होंने उस सांप को बड़ी सावधानी से पकड़ा और एक पन्नी या डिब्बे में बंद कर लिया। बिना एक पल बर्बाद किए वे बालक को लेकर सीधे जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंच गए।

डॉक्टरों ने सही इलाज कर बचाई जिंदगी

अस्पताल पहुंचकर मां ने डॉक्टर के सामने उस सांप को पेश किया ताकि जहर की सही पहचान हो सके। इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर यतेंद्र पुरवार ने जब सांप देखा, तो उन्होंने तुरंत इलाज की सही दिशा तय कर ली। सांप की प्रजाति की पहचान होने से डॉक्टरों के लिए एंटी-स्नेक वेनम का सही इस्तेमाल करना आसान हो गया। बच्चे का ब्लड सैंपल लिया गया और तत्काल उपचार शुरू कर दिया गया। डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई और परिजनों की बुद्धिमानी का ही परिणाम है कि मासूम यश अब पूरी तरह से खतरे से बाहर है और अस्पताल में उसका इलाज किया जा रहा है।

डॉक्टरों की लोगों से खास अपील

इस घटना के बाद जिला अस्पताल के डॉक्टर यतेंद्र पुरवार ने आम जनता को एक महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने बताया कि बारिश के इस मौसम में नमी और उमस के कारण सांप अक्सर अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं। ऐसे में विशेष रूप से बच्चों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने सलाह दी है कि बच्चों को अंधेरे वाले स्थानों पर न जाने दें और खेतों या बाहर जाते समय जूते जरूर पहनें। डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि कई बार लोग सांप के काटने के बाद जहर से ज्यादा डर और घबराहट के कारण दम तोड़ देते हैं। झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में समय गंवाने के बजाय मरीज को बिना देरी किए सरकारी अस्पताल लेकर आना चाहिए, क्योंकि वहां एंटी-स्नेक वेनम की सुविधा उपलब्ध रहती है, जो मरीज की जान बचाने के लिए सबसे प्रभावी उपचार है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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