'यह ऑपरेशन टाइगर नहीं, ऑपरेशन गीदड़ है', उद्धव की पार्टी में बगावत पर भड़के नाना पटोले महाराष्ट्र एक महीने पहले 45
उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी है। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस नेता नाना पटोले ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'ऑपरेशन गीदड़' करार दिया।

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आया है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) में दोबारा फूट पड़ गई है। राज्य में चले तथाकथित ऑपरेशन टाइगर के बाद पार्टी के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर खुद को एक अलग गुट के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग रखी है। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। मामले पर कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे ऑपरेशन टाइगर नहीं, बल्कि 'ऑपरेशन गीदड़' बताया है।

किन सांसदों ने थामा बगावत का रास्ता?

शिवसेना यूबीटी के जिन 6 लोकसभा सांसदों ने पार्टी के खिलाफ बगावत की है, उनके नाम अब सामने आ चुके हैं। ये सांसद इस प्रकार हैं—

  • संजय दीना पाटिल- मुंबई उत्तर-पूर्व (Mumbai North East) लोकसभा सीट
  • संजय जाधव- परभणी लोकसभा सीट
  • भाऊसाहेब वाकचौरे- शिर्डी लोकसभा सीट
  • संजय देशमुख- यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट
  • नागेश पाटिल- हिंगोली लोकसभा सीट
  • ओमराजे निंबालकर- धाराशिव लोकसभा सीट

नाना पटोले का तीखा हमला

उद्धव ठाकरे की पार्टी के 6 सांसदों के अलग गुट बनाने पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा, "यह ऑपरेशन टाइगर नहीं, ऑपरेशन गीदड़ है। भारतीय जनता पार्टी क्षेत्रीय दलों को खत्म कर देना चाहती है। उसे लोकतंत्र पर भरोसा ही नहीं है। बीजेपी की सत्ता की भूख कभी नहीं मिटने वाली। महाराष्ट्र में पहले शिवसेना के टुकड़े किए गए और फिर एनसीपी को तोड़ा गया। इसे ऑपरेशन टाइगर नाम दिया गया, जबकि यह तो टाइगर का अपमान है, असल में यह गीदड़ का ऑपरेशन है।"

नाना पटोले ने आगे यह भी कहा कि कांग्रेस के सांसदों को तोड़ पाना इतना आसान काम नहीं है, इसलिए पार्टी के लिए घबराने की कोई बात नहीं है। शिवसेना यूबीटी के सांसदों की बगावत पर उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से इसमें पैसों का लेनदेन हुआ होगा। ये लोग जनमत को स्वीकार ही नहीं करते।"

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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