उद्धव ठाकरे का छलका दर्द: 'आज नहीं तो क्या, कल जरूर मेरा होगा' महाराष्ट्र एक महीने पहले 15
सांसदों की बैठक में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी में बगावत और नेताओं के पलायन पर अपनी पीड़ा जाहिर की और भरोसा जताया कि भविष्य में हालात बदलेंगे।

महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर गरमाई हुई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी में बड़ी सेंध लग सकती है। कहा जा रहा है कि पार्टी के 9 में से 7 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। दावा किया जा रहा है कि उद्धव की पार्टी में तोड़फोड़ के लिए शिंदे की ओर से 'ऑपरेशन टाइगर' चलाया जा रहा है, जिसकी जिम्मेदारी उन्होंने अपनी पार्टी के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री प्रताप जाधव और एमएलसी कृपाल तुमाने को सौंपी है। इन्हीं अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने रविवार को अपने सांसदों की बैठक बुलाई, जिसमें उनका दर्द खुलकर सामने आया।

बैठक में क्या कहा उद्धव ठाकरे ने

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसदों की इस बैठक में पार्टी प्रमुख की पीड़ा साफ झलकी। पार्टी में हुई बगावत और नेताओं के साथ छोड़ने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही आज वक्त उनके पक्ष में न हो, मगर आगे चलकर हालात निश्चित रूप से बदलेंगे।

उद्धव ठाकरे ने बैठक में कहा, “आज मेरा नहीं, लेकिन कल मेरा जरूर होगा। तब तक हमें सहना पड़ेगा, संघर्ष करना पड़ेगा।” पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना छोड़ी है, उन्हें एक दिन पछतावा जरूर होगा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।”

'जबरदस्ती रोकने का क्या मतलब'

बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने चार साल पहले शिवसेना में हुई बड़ी बगावत को भी याद किया। उन्होंने कहा, “पार्टी में बड़ी फूट पड़ी, 40 विधायक चले गए। मैं उस समय राज्य का मुख्यमंत्री था। जो बातें सभी को पता चल रही थीं, क्या मुझे पता नहीं थीं? मुझे इसकी भनक थी।”

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी को रोकने या किसी पर दबाव डालने की कोशिश नहीं की। उद्धव ठाकरे ने कहा, “मैंने किसी पर दबाव नहीं डाला, किसी के खिलाफ फाइलें तैयार नहीं करवाईं। जो जाना चाहता है, उसे जबरदस्ती रोकने का क्या मतलब है?”

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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