रामग्राम का बंबू हाउस बदहाली की कगार पर, टूटी सीढ़ियां और जमी गंदगी से पर्यटक बना रहे दूरी उत्तर प्रदेश 6 दिन पहले 7
महराजगंज के रामग्राम में बांस से बना आकर्षक बंबू हाउस अब रखरखाव की कमी से जर्जर होता जा रहा है। टूटी सीढ़ियां, फैली गंदगी और कमजोर रेलिंग के कारण पर्यटक यहां आने से कतराने लगे हैं।

महराजगंज जिला अपने प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और हरियाली के लिए जाना जाता है। जिले के बड़े हिस्से में फैला वन क्षेत्र इसे वन संपदा की दृष्टि से समृद्ध बनाता है। यहां कई धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जिनकी अपनी अलग पृष्ठभूमि और मान्यताएं हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख स्थल रामग्राम है, जिसे जिले के बड़े ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।

रामग्राम में बांस की लकड़ियों से तैयार किया गया एक बंबू हाउस लंबे समय से पर्यटकों के बीच खास आकर्षण रहा है। जंगलों के पास बसा यह बंबू हाउस अपनी अनूठी बनावट, शांत माहौल और प्राकृतिक हरियाली के चलते लोगों को खूब लुभाता रहा है। जब इसका निर्माण हुआ था, तब स्थानीय लोगों में खासा उत्साह था और यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ गई थी। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो जमकर वायरल हुए और इसकी व्यापक चर्चा होने लगी थी। लेकिन समय बीतने के साथ उपेक्षा और रखरखाव के अभाव में यह बंबू हाउस अब धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है।

गंदगी का अड्डा बनता जा रहा बंबू हाउस

शुरुआती दौर में यहां की साफ-सफाई और बंबू हाउस की मजबूत संरचना लोगों को सुकून देती थी। लेकिन अब हालत यह है कि जैसे ही कोई बंबू हाउस में प्रवेश करता है, उसे टूटे टाइल्स वाली सीढ़ियां और चारों ओर बिखरी गंदगी दिखाई देती है। प्रवेश द्वार पर टाइल्स पर मोटी मिट्टी की परत जमी नजर आती है, जो देखने में बेहद भद्दी लगती है। यह दृश्य आते ही लोगों पर नकारात्मक असर डालता है।

लंबे समय से देखरेख और सफाई न होने के कारण फर्श टूटने लगा है और उस पर कचरा बिखरा रहता है। मिट्टी जमे रहने की वजह से लोहे के बेस वाली सीढ़ियां भी खराब होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। यदि स्थिति यही रही, तो धीरे-धीरे लोहे में जंग लगने से सीढ़ियां टूट भी सकती हैं। बांस से बनी दीवारें और रेलिंग भी जगह-जगह से टूटने लगी हैं और समय पर मरम्मत न होने पर इनके अलग होने का खतरा बना हुआ है। कभी इस बंबू हाउस के भीतर इतनी साफ-सफाई रहती थी कि लोग आराम से बैठकर समय बिताते थे, लेकिन अब बैठना तो दूर, ज्यादा देर तक खड़े रहना भी लोगों को रास नहीं आता।

लगातार कमजोर हो रही संरचना

ध्यान देने वाली बात यह है कि इसी तरह का एक और बंबू हाउस पास के जंगल में भी बनाया गया था, जिसकी छत आंधी-तूफान के दौरान टूटकर गिर गई। यदि समय रहते रामग्राम के इस बंबू हाउस को मजबूत नहीं किया गया, तो इसके साथ भी ऐसी ही स्थिति बन सकती है। इसकी छत में लगी बांस की बल्लियां असंतुलित होने लगी हैं और अपनी मूल जगह से हटकर दूसरी दिशा में झुक रही हैं, जिससे इसकी मजबूती पर असर पड़ रहा है।

खासकर चारों ओर बनी रेलिंग काफी कमजोर हो चुकी है। फर्स्ट फ्लोर पर लगी बांस की कई बल्लियां टूट चुकी हैं और उनके बीच कचरा भर गया है। इसके अलावा कुछ लोग पान मसाला खाकर पैकेट वहीं फेंक देते हैं, जो बांस की बल्लियों के नीचे साफ दिखाई देते हैं और माहौल को और गंदा बना देते हैं।

घटता आकर्षण, दूरी बनाते पर्यटक

बंबू हाउस के प्रति यह उदासीनता पर्यटन की दृष्टि से बिल्कुल भी ठीक नहीं मानी जा रही। पहले जैसा आकर्षण अब यहां नहीं बचा है। टूटी रेलिंग, फैली गंदगी और अव्यवस्था के चलते पर्यटक धीरे-धीरे इस जगह से दूरी बनाने लगे हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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