मधुबनी न्यूज़: मिथिला हाट में मधुश्रावणी पर्व पर 12 दिनों तक सजेगी संस्कृति की महफिल, जानें क्या होगा खास बिहार एक घंटा पहले 2
मधुबनी के अररिया संग्राम स्थित मिथिला हाट में 3 अगस्त से मधुश्रावणी पर्व के उपलक्ष्य में 12 दिवसीय सांस्कृतिक महाउत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लोक कलाओं और प्रतियोगिताओं का आनंद मुफ्त में लिया जा सकेगा।

मिथिला हाट में सांस्कृतिक उत्सव की शुरुआत

मधुबनी जिले के अररिया संग्राम में स्थित मिथिला हाट एक बार फिर से अपनी सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। आगामी 3 अगस्त से मधुश्रावणी पर्व के विशेष अवसर पर यहाँ 12 दिनों तक चलने वाले एक भव्य सांस्कृतिक महाउत्सव का आगाज़ हो रहा है। यह आयोजन 3 अगस्त से लेकर 14 अगस्त तक चलेगा, जिसमें स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं और कलाओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य मिथिला की लोक विधाओं को संरक्षण देना और स्थानीय प्रतिभाओं को एक बेहतर मंच प्रदान करना है।

मधुश्रावणी पर्व का महत्व

मिथिलांचल में मधुश्रावणी पर्व का विशेष स्थान है, जिसे मुख्य रूप से नवविवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। सावन के महीने में आने वाला यह पर्व कुल 15 दिनों की लंबी अवधि तक चलता है। मान्यता है कि इस दौरान नवविवाहित महिलाएं पूरे विधि-विधान से शिव-पार्वती और नाग देवता की पूजा करती हैं। इस दौरान प्रकृति और विभिन्न जीव-जंतुओं की भी आराधना की जाती है। माना जाता है कि इस अनुष्ठान से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है, पति की आयु लंबी होती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। मिथिला की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और यहाँ की संस्कृति का अभिन्न अंग है।

आयोजन में क्या होगा खास

मिथिला हाट में आयोजित होने वाले इस 12 दिवसीय कार्यक्रम में दर्शकों के लिए मनोरंजन और कला का भरपूर तड़का होगा। आयोजकों के अनुसार, उत्सव के दौरान निम्नलिखित कार्यक्रमों का आनंद लिया जा सकेगा:

  • डाली सज्जा प्रतियोगिता: हर दिन डाली को सबसे सुंदर तरीके से सजाने वाले प्रतिभागी को पर्यटन विभाग की तरफ से सम्मानित किया जाएगा।
  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: यहां लोकगीत, लोकनृत्य और स्टेज शो का आयोजन होगा।
  • फैशन और कला: उत्सव के आकर्षण में रैंप वॉक, आर्ट एंड क्राफ्ट की प्रदर्शनी और मिथिला पेंटिंग की प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
  • पुरस्कार वितरण: प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाण पत्र और विशेष पुरस्कारों से नवाजा जाएगा, साथ ही अंतिम दिन भव्य सम्मान समारोह का आयोजन होगा।

इस पूरे आयोजन में आम जनता के लिए प्रवेश पूरी तरह से निशुल्क रखा गया है।

स्थानीय कलाकारों को मिलेगा नया अवसर

मिथिला हाट की प्रबंधन टीम से जुड़ीं नंदनी सिंह और अंबे मिश्रा ने बताया कि यह स्थल अब स्थानीय कलाकारों और हुनरमंद लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इस महाउत्सव के माध्यम से न केवल मिथिला पेंटिंग, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कलाकारों को भी अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त होगा। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के मंच मिलने से कलाकारों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलते हैं। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि और विशिष्ट हस्तियों के भी शिरकत करने की संभावना है, जिससे कलाकारों को बड़े लोगों से संवाद करने का मौका मिलेगा।

डिजिटल युग में पारंपरिक संस्कृति

आज के डिजिटल युग में, जहाँ सोशल मीडिया और ऑनलाइन कंटेंट का बोलबाला है, मिथिला हाट का यह प्रयास पुरानी परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का एक माध्यम है। आने वाले दर्शकों को न केवल मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का मौका मिलेगा, बल्कि वे डिजिटल माध्यमों के साथ जुड़कर इसे व्यापक स्तर पर प्रचारित भी कर सकेंगे। 12 दिनों तक चलने वाला यह आयोजन पूरी तरह से निशुल्क है, जिससे सभी वर्गों के लोग यहाँ आकर लोक संस्कृति के विभिन्न रंगों का आनंद उठा सकते हैं और प्रतियोगिताओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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