मधुबनी में केंद्र सरकार की पहल, ग्रामीण हुनरमंदों को मिल रहा कमाई का शानदार अवसर बिहार एक घंटा पहले 3
केंद्र सरकार के जन शिक्षण संस्थान के जरिए मधुबनी में युवाओं और महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। अनुभवी लोग यहाँ प्रशिक्षक बनकर हर दिन कमाई कर सकते हैं।

हुनर के जरिए आत्मनिर्भर बनने का मौका

मधुबनी के जन शिक्षण संस्थान (JSS) की ओर से केंद्र सरकार एक अनूठी पहल चला रही है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और युवाओं को न केवल कुशल बनाना है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसके तहत विभिन्न प्रकार के कौशल प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं ताकि स्थानीय लोग अपना रोजगार शुरू कर सकें।

प्रशिक्षक बनने के लिए योग्यता और शर्तें

इस योजना में काम करने के लिए सरकार अनुभवी कलाकारों और जानकारों को रिसोर्स पर्सन यानी प्रशिक्षक के तौर पर नियुक्त कर रही है। यदि आप भी इस क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं, तो इसके लिए कुछ निर्धारित मानक पूरे करने होंगे:

  • उम्मीदवार का कम से कम 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है।
  • आवेदन करने वाले व्यक्ति की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
  • आवेदक के पास संबंधित क्षेत्र का 3 से 4 साल का कार्य अनुभव होना चाहिए।
  • संबंधित क्षेत्र में आवश्यक प्रमाण पत्र का होना भी अनिवार्य है।
  • प्रशिक्षक के पास एक स्मार्टफोन होना जरूरी है।

कौन-कौन से क्षेत्रों में मिल रहा है मौका

मधुबनी अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। इस योजना के तहत विशेष रूप से मिथिला पेंटिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा सिलाई, कढ़ाई और ब्यूटी पार्लर जैसे ट्रेड में भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले लोग अपनी सेवाएं देकर समाज को प्रशिक्षित कर सकते हैं।

कितनी होगी कमाई

इस संस्थान से जुड़कर प्रशिक्षण देने वाले रिसोर्स पर्सन को सरकार की ओर से मानदेय भी दिया जाता है। चयनित प्रशिक्षकों को प्रति दिन के हिसाब से 250 से 300 रुपये तक का मानदेय भुगतान किया जाता है। यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन अवसर है जो अपने हुनर को दूसरों के साथ साझा कर नियमित आय अर्जित करना चाहते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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