बिहार
58 मिनट पहले
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अचानक करोड़ों की मालकिन बनी किशोरी
बिहार के मधेपुरा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के ग्वालपाड़ा प्रखंड अंतर्गत पड़ोकिया गांव में रहने वाली एक किशोरी के बैंक खाते में अचानक 759 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की राशि दिखाई देने लगी। इस खबर के फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और परिवार के लोग भी कुछ पलों के लिए खुशी से झूम उठे। मामला पड़ोकिया गांव के वार्ड संख्या आठ का है, जहां अनिल दास की 17 वर्षीय बेटी रूपा कुमारी का सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में एक बैंक खाता है।
रसीद ने उड़ाई होश
घटना की शुरुआत शनिवार को हुई, जब रूपा कुमारी ने गांव में ही स्थित एक सीएसपी केंद्र पर जाकर आधार सक्षम भुगतान प्रणाली यानी AEPS के जरिए 800 रुपये की निकासी की। लेनदेन पूरा होने के बाद जब सीएसपी संचालक ने उसे रसीद दी, तो उस पर छपी राशि देखकर रूपा और उसके परिजन दंग रह गए। रसीद में उपलब्ध शेष राशि 7,59,69,51,951.16 रुपये दिखाई दे रही थी। इतनी बड़ी रकम का अचानक सामने आना किसी के भी यकीन से परे था।
क्या था हकीकत का सच
परिजनों के अनुसार, रूपा का यह खाता एक माइनर अकाउंट है, जिसमें आमतौर पर बहुत ही कम धनराशि रहती है। इससे पहले भी वह दो बार 5-5 हजार रुपये की निकासी कर चुकी है। रसीद में बैंक का नाम और 800 रुपये के सफल लेनदेन की जानकारी तो सही थी, लेकिन खाते में दर्ज 759 करोड़ से ज्यादा की रकम ने पूरे परिवार को परेशानी में डाल दिया। परिजनों को डर सताने लगा कि कहीं यह किसी बड़ी धोखाधड़ी या खाते में किसी तकनीकी गड़बड़ी का परिणाम तो नहीं है, जिसके बाद उन्होंने बैंक से स्पष्टीकरण की मांग की।
तकनीकी समस्या का निकला नतीजा
मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बिहारीगंज के सहायक शाखा प्रबंधक अनिमेष अंशु ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पूर्व बैंक के सिस्टम सॉफ्टवेयर में एक अपडेट किया गया था, जिसके चलते कुछ ग्राहकों के खातों में गलत बैलेंस दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे पूरी तरह से एक तकनीकी त्रुटि करार दिया और आश्वासन दिया कि अगले दो से तीन दिनों में यह समस्या अपने आप ठीक हो जाएगी। जब रूपा को पता चला कि यह सब सिर्फ एक सॉफ्टवेयर की गलती थी, तो उसका अरबपति बनने का सपना एक पल में चकनाचूर हो गया।
बिहार में पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
गौरतलब है कि बिहार में इस तरह की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी सुपौल जिले में इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां एक आंगनबाड़ी सहायिका के बैंक खाते में 740 करोड़ रुपये दिख रहे थे। तब भी उस मामले ने पूरे इलाके में खासी सुर्खियां बटोरी थीं। अब मधेपुरा का यह वाकया चर्चा का विषय बना हुआ है।
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