भारत
एक घंटा पहले
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विचारों
बीते कुछ वर्षों में भारत के रक्षा निर्यात में जबरदस्त तेजी आई है और देश ने 'मेड इन भारत' ब्रांड को वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूती से स्थापित कर दिया है। इस उपलब्धि के केंद्र में पांच प्रमुख प्रणालियां और गोला-बारूद हैं — ब्रह्मोस, पिनाका, आकाश, स्वाति रडार और 155 एमएम एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन (ATAGS)। इन्हें अब आर्मेनिया से लेकर फिलीपींस तक कई देश अपना चुके हैं। इन प्रणालियों के निर्यात ने न केवल भारतीय रक्षा उद्योग की साख बढ़ाई है, बल्कि देश को 2030 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात लक्ष्य की ओर भी तेजी से आगे बढ़ाया है।
'मेक इन इंडिया' से मिली रफ्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत भारत ने अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को अभूतपूर्व ढंग से बढ़ाया है। सरकार ने निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए निजी क्षेत्र और रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) को बढ़ावा दिया है। इसी का नतीजा रहा कि वर्ष 2024-25 में रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।
आज अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया जैसे देश भारत के शीर्ष रक्षा खरीदारों में शामिल हैं। दक्षिण पूर्व एशिया में फिलीपींस और वियतनाम जैसे रणनीतिक साझेदारों ने भी भारतीय हथियार खरीदे हैं। वहीं नेपाल, मॉरिशस और मालदीव जैसे द्वीपीय देशों ने तटीय सुरक्षा के लिए HAL ध्रुव हेलिकॉप्टर हासिल किए हैं।
परेड और प्रदर्शनों ने बढ़ाई साख
शिपमेंट और सार्वजनिक प्रदर्शनों ने भी भारत की विश्वसनीयता को और पुख्ता किया है। उदाहरण के तौर पर, आर्मेनिया ने अपने गणतंत्र दिवस की सैन्य परेड में भारत के आकाश एयर-डिफेंस मिसाइल सिस्टम, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार और ATAGS तोपों को शामिल किया, जो परेड में पहली बार प्रदर्शित किए गए। यह दोनों देशों के बीच गहराते रक्षा सहयोग का प्रतीक है।
भारत के रक्षा निर्यात का दायरा कितना व्यापक है, यह इन तथ्यों से समझा जा सकता है:
- भारत दुनिया के 84 देशों को रक्षा सामग्री का निर्यात करता है।
- दुनिया के 34 देशों को बुलेट प्रूफ जैकेट और हेलमेट भेजे जाते हैं।
- जर्मनी, कंबोडिया, मेक्सिको और सऊदी अरब को आर्मर शी!्डिंग का निर्यात होता है।
- नेपाल, मॉरिशस और मालदीव जैसे द्वीपीय देशों ने HAL ध्रुव हेलिकॉप्टर खरीदे हैं।
- केन्या, मिस्र, थाईलैंड, यूएई और नेपाल जैसे देशों को 5.56 एमएम से लेकर 155 एमएम तक का गोला-बारूद भेजा जाता है।
ब्रह्मोस मिसाइल (सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल)
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया ने ब्रह्मोस की मारक क्षमता को करीब से देखा। DRDO और रूस की NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया की साझेदारी से विकसित यह बेहद तेज (Mach 2.8) क्रूज मिसाइल है, जिसका कवचभेदी वारहेड लगभग 300 किलोग्राम का है। जमीन, जल और वायु — तीनों माध्यमों से दागी जा सकने वाली इस मिसाइल की रेंज करीब 290 किमी है, जिसे नए वेरिएंट में 450 किमी तक बढ़ाया जा सकता है।
भारत ने फिलीपींस को तीन बैटरियां बेची हैं (US$375 मिलियन का सौदा, 2022), जिनमें पहली बैटरी अप्रैल 2024 में और दूसरी अप्रैल 2025 में सौंपी गई। वियतनाम ने भी ₹6,000 करोड़ (लगभग $629M) के ब्रह्मोस सौदे पर 2026 में हस्ताक्षर कर दिए हैं, जबकि इंडोनेशिया के साथ बातचीत जारी है। इस तरह ब्रह्मोस का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और यह ASEAN देशों में एक बड़ी सफलता बन चुका है।
पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम
DRDO का यह 214 मिमी कैलिबर का मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर उच्च सटीकता वाली गाइडेड रॉकेट क्षमता से लैस है। प्रत्येक लॉन्चर में 12 रॉकेट रखे जा सकते हैं और एक बैटरी में 6 लॉन्चर (72 रॉकेट तत्पर) तथा 6 लोडिंग वाहन (कुल 128 रॉकेट) होते हैं। इसकी वास्तविक रेंज करीब 75 किमी है, जबकि नई गाइडेड वेरिएंट की रेंज 120 किमी तक आंकी गई है।
वर्ष 2026 में भारत ने आर्मेनिया को पहली बार गाइडेड पिनाका रॉकेट बेचे (चार बैटरियों के लिए ₹2,000 करोड़ का सौदा)। इससे पहले 2023-24 में नॉन-गाइडेड रॉकेट की आपूर्ति की जा चुकी थी। आर्मेनिया इस प्रणाली का पहला अंतरराष्ट्रीय ग्राहक है, जबकि फ्रांस सहित अन्य यूरोपीय देश भी इसमें रुचि दिखा चुके हैं।
आकाश मिसाइल सिस्टम (एयर डिफेंस)
DRDO निर्मित यह मोबाइल सतह-से-वायु मिसाइल है, जिसका Mk-I संस्करण करीब 30 किमी तक की इंटरसेप्ट रेंज रखता है। यह Mach 2.5 की रफ्तार से उड़ती है, 60 किग्रा का वारहेड ले जा सकती है और 20 किमी की ऊंचाई तक मार कर सकती है। एक आकाश लॉन्चर पर तीन मिसाइलें होती हैं और एक बैटरी में आमतौर पर 6 लॉन्चर (18 मिसाइलें) होते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में शानदार प्रदर्शन के बाद विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ी है। आर्मेनिया ने आकाश खरीदा है और इसी के साथ वह भारत का पहला विदेशी ग्राहक बना, जबकि यूएई और इंडोनेशिया भी इस प्रणाली की खरीद पर बातचीत कर रहे हैं। हालांकि यूएई के साथ रिपोर्ट किया गया सौदा अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है।
स्वाति रडार (वेपन लोकेटिंग रडार)
यह BEL और DRDO की संयुक्त परियोजना है और एक आधुनिक 3D फेज्ड-एरे रडार है, जो बैलिस्टिक या क्रूज मिसाइलों, गोला-बारूद और क्रूज रॉकेट की लोकेशन का पता लगाता है। स्वाति की रेंज 50 से 70 किमी तक होती है और यह दुश्मन के तोपखाने पर जवाबी फायर का समन्वय करने में मददगार है।
मार्च 2020 में आर्मेनिया ने स्वाति का पहला निर्यात खाता खोला (₹300 करोड़, $40M)। यह सौदा भारत के लिए बेहद अहम था, क्योंकि इसने साबित किया कि भारतीय रक्षा प्रणालियां रूस और पोलैंड जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं को भी पीछे छोड़ सकती हैं।
एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS)
यह भारत की नवीनतम 155 एमएम तोप है। 52-कैलिबर लंबी नली वाली यह तोप 15 सेकंड में तीन गोले दाग सकती है और करीब 48 किमी तक लक्ष्य को भेद सकती है। इसमें चार्ज अटैच कर अधिक स्वचालित फायरिंग रेट और कमांड-एंड-कंट्रोल के लिए एडवांस्ड नेटवर्किंग की सुविधा है। परीक्षणों में साबित हुआ है कि यह अर्ध-स्वचालित प्रणाली ऊंचाई वाले इलाकों में भी -15°C से +50°C तापमान में काम कर सकती है।
आर्मेनिया ने अपने पहाड़ी इलाकों के लिए ATAGS में खास दिलचस्पी दिखाई। उसने वर्ष 2023 में छह ATAGS खरीदीं और 2024 में अतिरिक्त 84 तोपों (US$155M में) का सौदा किया। इस प्रणाली के साथ भारत ATAGS का पहला निर्यातक बन गया है, जिससे अन्य संभावित खरीदारों के लिए भी रास्ता खुल गया है।
HAL ध्रुव ALH (उन्नत हल्का हेलिकॉप्टर)
यह HAL का 5.5 टन वर्ग का मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर है, जिसका इस्तेमाल सैन्य अभियानों और आपदा राहत मिशनों में होता है। इसकी रेंज करीब 640 किमी और क्रूज स्पीड लगभग 268 किमी/घंटा है, तथा इसमें 12.5 किलोवाट शक्ति इंजन लगा है। ध्रुव वायुसेना, नौसेना और सीमा सुरक्षा बल समेत भारतीय रक्षा बलों में 130 से अधिक यूनिट के रूप में सेवा दे चुका है।
निर्यात के लिहाज से इक्वाडोर (5-6 हेलिकॉप्टर), नेपाल (2), मॉरिशस (1+1) और मालदीव (1 उपहार स्वरूप) को ध्रुव बेचा जा चुका है। उदाहरण के तौर पर, जनवरी 2022 में HAL ने मॉरिशस को Mk III वेरिएंट का एक ध्रुव सौंपने का अनुबंध किया। विदेशों में इसके बढ़ते इस्तेमाल से भारतीय हेलिकॉप्टर भी अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं।
रणनीतिक मोर्चों पर बढ़ता दबदबा
ये तमाम निर्यात सौदे भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को मजबूती दे रहे हैं और 'मेक इन इंडिया' की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर रहे हैं। चीन के कमजोर साबित होते हथियारों के मुकाबले ये 'मेड इन भारत' हथियार खरीदारों को नए और भरोसेमंद विकल्प दे रहे हैं। भारतीय प्रणालियों ने आर्मेनिया को रूसी हथियारों पर निर्भरता से भी उबारा है। बड़े सौदों और सफल परेड प्रदर्शनों से साफ है कि अब स्वदेशी हथियार रणनीतिक मोर्चों पर भारत की धाक बढ़ा रहे हैं। आने वाले समय में कई और देशों के साथ ऐसे सहयोग की संभावनाएं हैं, जिससे भारत वैश्विक रक्षा बाजार में एक अहम आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरेगा।
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