मदन मित्रा का टीएमसी से मोहभंग, बागी खेमे में शामिल होकर ममता बनर्जी पर लगाए गंभीर आरोप पश्चिम बंगाल एक महीने पहले 76
तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा ने पार्टी से इस्तीफा देकर रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट का हाथ थाम लिया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर संगठन से अधिक एक व्यक्ति विशेष को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है।

ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचाते हुए विधायक मदन मित्रा ने ममता बनर्जी की पार्टी से नाता तोड़ लिया है। उन्होंने न केवल इस्तीफा दिया है, बल्कि विपक्षी नेता रिताब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में भी शामिल हो गए हैं। बुधवार को बागी खेमे में जाने के बाद मदन मित्रा ने अपनी नाराजगी के कई कारण गिनाए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि टीएमसी का मौजूदा नेतृत्व संगठन की मजबूती की जगह केवल सांसद अभिषेक बनर्जी को प्रमोट करने में लगा हुआ है।

क्यों छोड़ा पार्टी का साथ

मदन मित्रा के अनुसार, वह लंबे समय से पार्टी के भीतर असहज महसूस कर रहे थे और उनके काम करने के रास्ते में बाधाएं डाली जा रही थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनकी चिंताओं को कभी गंभीरता से नहीं लिया। मित्रा का मानना है कि टीएमसी अब किसी एक व्यक्ति की इच्छाओं पर चलने वाली पार्टी बनकर रह गई है, जो वास्तव में गलत है। उन्होंने दावा किया कि वे ममता बनर्जी के सामने बार-बार अपनी समस्याएं रखते रहे, लेकिन हमेशा अनसुना किया गया। मित्रा का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी चाहते हैं कि पार्टी के हर छोटे-बड़े फैसले केवल उन्हीं की शर्तों पर हों और वे किसी और को अहम जिम्मेदारी देने के पक्ष में नहीं हैं, जिससे पार्टी धीरे-धीरे कमजोर हो रही है।

विपक्षी नेता का तीखा प्रहार

इस पूरे मामले पर विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी ने इसे तानाशाही के खिलाफ एक वैचारिक लड़ाई करार दिया है। रिताब्रत का कहना है कि यह सत्ता के केंद्रीकरण और फासीवादी प्रवृत्तियों को खत्म करने का आंदोलन है। उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र और सामूहिक फैसलों की बहाली के लिए जारी इस संघर्ष में लगातार लोग जुड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही अनुब्रत मंडल भी 21 जुलाई की रैली के दौरान इस बागी आंदोलन का हिस्सा बनेंगे।

टीएमसी का पलटवार

दूसरी तरफ ममता बनर्जी के गुट ने भी मदन मित्रा के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विधायक कुणाल घोष ने मित्रा के बागी होने के पीछे केंद्रीय जांच एजेंसियों का दबाव बताया। घोष ने आरोप लगाया कि हाल ही में ED ने मदन मित्रा की पत्नी और बेटे को पूछताछ के लिए बुलाया था, जिसके चलते वे दबाव में आकर यह फैसला लेने पर मजबूर हुए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि तथाकथित बागियों के साथ जमीन पर कोई कार्यकर्ता नहीं है। साथ ही उन्होंने मित्रा के हालिया बयानों पर सवाल उठाते हुए उनके दोहरे रवैये पर निशाना साधा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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