उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
कभी निवेशकों की पसंद की सूची में पिछड़ा रहने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेज गति से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते 9 वर्षों में प्रदेश ने औद्योगिक विकास, निवेश, बुनियादी ढांचे और रोजगार के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर तालमेल ने अनेक अहम पहलों के जरिए यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर किया है।
सपा शासन में सुस्ती, योगी राज में रिकॉर्ड निवेश
वर्ष 2017 से पहले सपा सरकार के दौरान प्रदेश में निवेश की रफ्तार लगभग थम सी गई थी। कानून-व्यवस्था, अधूरे बुनियादी ढांचे और निवेश के अनुकूल माहौल की कमी को निवेशक बड़ी चिंता मानते थे, लेकिन 2017 के बाद हालात तेजी से बदले। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव हासिल हुए हैं, जिनसे करीब 1.10 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के चार चरणों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट जमीन पर उतर चुके हैं, जिनसे करीब 60 लाख रोजगार सृजित हुए हैं। वहीं 7.5 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के साथ 5वीं जीबीसी प्रस्तावित है। यह बदलाव दर्शाता है कि निवेशकों का भरोसा पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत हुआ है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के अंतर्गत जटिल प्रक्रियाओं के अनुपालन में कटौती के मामले में यूपी को देश में पहला स्थान मिला है। 65 विभागों में प्रक्रियागत 4,675 अनुपालनों को घटाया गया है, जबकि व्यापार को आसान बनाने के लिए 13 राज्य अधिनियमों में करीब 99 प्रतिशत छोटे दंडात्मक प्रावधान हटा दिए गए हैं।
एक्सप्रेसवे क्रांति ने तेज की औद्योगिक रफ्तार
प्रदेश की औद्योगिक कामयाबी की सबसे बड़ी नींव मजबूत बुनियादी ढांचा है। 2017 तक यहां केवल दो एक्सप्रेसवे थे, जबकि आज उत्तर प्रदेश 22 एक्सप्रेसवे वाले राज्य के रूप में आकार ले रहा है। फिलहाल प्रदेश में 9 एक्सप्रेसवे संचालित हैं, 3 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा है।
एक्सप्रेसवे के किनारे 26 जिलों में 27 स्थानों पर 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिह्नित की गई है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीआईडीए) के जरिए 56,662 एकड़ क्षेत्र में नया औद्योगिक शहर बसाया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनेगा।
जल, थल और आकाश—हर ओर खुले रास्ते
वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल लखनऊ और वाराणसी के दो हवाई अड्डे पूरी तरह तथा गोरखपुर हवाई अड्डा आंशिक रूप से चालू था। बीते 9 वर्षों में इस क्षेत्र में तेज विकास हुआ और नतीजतन इस समय प्रदेश में 17 हवाई अड्डे संचालित हैं तथा 7 अन्य का विकास जारी है। नोएडा (जेवर) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के शुरू होने के साथ ही यूपी 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
माल ढुलाई के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के अंतर्गत पूर्वी फ्रेट कॉरिडोर का 1,050 किमी से अधिक हिस्सा प्रदेश से होकर गुजरता है, जबकि पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी का जंक्शन दादरी में है। भारत के 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 11 अकेले उत्तर प्रदेश में हैं। इसके अलावा देश का पहला मल्टी-कॉरिडोर टर्मिनल और 100 एकड़ से अधिक का फ्रेट विलेज वाराणसी में बनाया जा रहा है।
एफडीआई, फैक्ट्रियों और निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
विदेशी निवेश, फैक्ट्रियों की संख्या और निर्यात औद्योगिक प्रगति के सबसे बड़े संकेतक माने जाते हैं और इन तीनों में प्रदेश ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। जून 2000 से मार्च 2017 तक यहां महज 3,303 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया था, जबकि अप्रैल 2017 से जून 2025 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 17,004 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, यानी पांच गुना से अधिक की वृद्धि हुई।
फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के तहत पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या 2016-17 में 14,169 थी, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर 31,459 हो गई—यानी औद्योगिक इकाइयां दोगुने से अधिक हुईं। निर्यात के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव दिखा। 2016-17 में प्रदेश का कुल निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये था, जो अब दो लाख करोड़ रुपये से आगे निकल चुका है।
आईटी और आईटीईएस निर्यात में तो और भी तेज वृद्धि हुई है। यह 2015 के 15 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 82 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 7 वर्षों में करीब 1,058 प्रतिशत बढ़ा है और 3,862 करोड़ रुपये (2017-18) से बढ़कर 44,744 करोड़ रुपये (2024-25) तक पहुंच चुका है।
एमएसएमई और ओडीओपी बने गेमचेंजर
एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती देना योगी सरकार की अहम उपलब्धियों में से एक है। फिलहाल प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में 3.11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
इस योजना के अंतर्गत 20,396 उद्यमियों को 903.63 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी गई, जिससे सवा तीन लाख से अधिक रोजगार के अवसर बने। कारीगरों को बाजार मुहैया कराने के लिए 8,435 लाभार्थियों को 80.48 करोड़ रुपये की सहायता दी गई और 24 जिलों में 30 कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के जरिए सवा चार लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि प्लेज योजना के तहत 10 से 50 एकड़ वाले 12 औद्योगिक पार्कों के विकास पर भी काम चल रहा है।
रक्षा, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर में नई पहचान
कभी मुख्य रूप से कृषि प्रधान माना जाने वाला उत्तर प्रदेश बीते 9 वर्षों में हाई-टेक उद्योगों के केंद्र के रूप में उभरा है। रक्षा औद्योगिक गलियारे के 6 नोड झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और कानपुर में विकसित किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में अब तक करीब दो सौ एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जिनसे लगभग 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश और 55 हजार से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।
यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट लगाई जा रही है। एचसीएल और फॉक्सकॉन का यह संयुक्त उपक्रम 3,700 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगा। प्रदेश में डेटा सेंटर उद्योग भी तेजी से पनप रहा है और 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से आठ डेटा सेंटर पार्क बनाए जा रहे हैं। इसके लिए वर्ष 2030 तक 5 गीगावाट और 2047 तक 40 गीगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया है।
वैश्विक मंच पर मजबूत हुई यूपी की साख
निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय प्रयास किए हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 के दौरान एआई, डेटा सेंटर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में 2.94 लाख करोड़ रुपये के एमओयू हुए। सिंगापुर और जापान यात्राओं के दौरान 1.5 लाख करोड़ रुपये के एमओयू मिले तथा 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे करीब 5 लाख रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है। यह इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश अब वैश्विक निवेशकों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बन चुका है।
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