उत्तर प्रदेश
13 घंटे पहले
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उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने में बीते एक दशक के दौरान सबसे अहम भूमिका निभाने वाली सरकारी एजेंसियों में UPEIDA (Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority) का नाम सबसे ऊपर है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी विशाल परियोजनाएं इसी प्राधिकरण ने जमीन पर उतारी हैं। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस एजेंसी का कार्यभार सीधे अपने हाथ में ले लिया है।
इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़ी परियोजनाओं की रफ्तार और बढ़ाई जाएगी। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के बढ़ते फोकस के तौर पर देखा जा रहा है।
आखिर क्या है UPEIDA?
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी UPEIDA की स्थापना राज्य में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब और इनसे जुड़े विकास कार्यों के लिए की गई थी। इसका मकसद महज सड़क बनाना नहीं है, बल्कि सड़कों के किनारे उद्योग, निवेश, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और रोजगार के अवसर भी विकसित करना है। यही कारण है कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे को केवल परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के एक मॉडल के रूप में देखा जाता है।
UPEIDA की प्रमुख परियोजनाएं
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे
- लंबाई: लगभग 302 किमी
- उद्घाटन: 2016
- इससे यात्रा के समय में भारी कमी आई और पश्चिमी यूपी तथा राजधानी लखनऊ के बीच सीधी कनेक्टिविटी बनी।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
- लंबाई: लगभग 341 किमी
- लखनऊ से गाजीपुर तक बनाया गया है।
- लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये रही।
- इसने पूर्वी यूपी को राजधानी क्षेत्र से जोड़ा।
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
- लंबाई: लगभग 296 किमी
- चित्रकूट से इटावा क्षेत्र तक कनेक्टिविटी।
- अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये।
- यह बुंदेलखंड क्षेत्र को NCR नेटवर्क से जोड़ने वाला अहम मार्ग है।
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे
- लंबाई: लगभग 91 किमी
- गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ता है।
- इससे पूर्वी यूपी की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया।
गंगा एक्सप्रेसवे
- लंबाई: 594 किमी
- मेरठ से प्रयागराज तक।
- लागत लगभग 36,000 करोड़ रुपये से अधिक।
- यह राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे परियोजना है।
अभी किन परियोजनाओं पर चल रहा है काम?
फिलहाल UPEIDA कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें शामिल हैं:
- गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार और उससे जुड़े लिंक
- आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे
- अलीगढ़-आगरा एक्सप्रेसवे
- अलीगढ़-पलवल एक्सप्रेसवे
- अवध एक्सप्रेसवे
- चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे
- कई औद्योगिक कॉरिडोर और ई-वे हब परियोजनाएं
इसके अलावा पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे ई-वे हब, लॉजिस्टिक्स पार्क और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिन पर सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे इलाकों में एक्सप्रेसवे बनने के बाद औद्योगिक निवेश और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
सीएम के कमान संभालने से क्या बदलेगा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले से ही एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करते रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे समेत कई परियोजनाओं की साप्ताहिक मॉनिटरिंग और तय समयसीमा में काम पूरा करने पर खास जोर दिया है। वह कई मौकों पर मौके पर पहुंचकर निरीक्षण भी कर चुके हैं और उनका मकसद साफ रहा है कि इन अहम परियोजनाओं में किसी तरह की देरी न हो।
UPEIDA के सीधे मुख्यमंत्री की निगरानी में आने से सबसे पहले भूमि अधिग्रहण में आने वाली अड़चनें तेजी से दूर हो सकती हैं। साथ ही विभागों के बीच आपसी समन्वय बेहतर होगा और वित्तीय मंजूरियों में भी तेजी आएगी। परियोजनाओं की समयसीमा को लेकर सख्ती बढ़ेगी, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कई बड़ी परियोजनाएं धरातल पर दिखाई दे सकती हैं।
2027 चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा बड़ा मुद्दा?
यूपी की राजनीति में एक्सप्रेसवे अब सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि विकास का प्रतीक बन चुके हैं। भाजपा सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गंगा एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और नए लिंक एक्सप्रेसवे को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहेगी। यही वजह है कि UPEIDA पर मुख्यमंत्री की सीधी नजर को महज प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि विकास और राजनीति दोनों लिहाज से बेहद अहम कदम माना जा रहा है।
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