झारखंड
2 घंटे पहले
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पलामू में बारिश की मार और किसानों की चिंता
झारखंड के पलामू जिले में इस बार खरीफ सीजन के दौरान किसान मानसून की बेरुखी से काफी परेशान हैं। आमतौर पर खेती की सफलता आसमान से बरसने वाले पानी पर निर्भर होती है, लेकिन इस बार बारिश का आंकड़ा संतोषजनक नहीं है। जिले में अब तक औसत से बेहद कम बारिश दर्ज की गई है, जो कि सामान्य से लगभग 70% से 75% तक कम है। इस स्थिति ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि उनके सामने फसलों के सूखने का संकट मंडरा रहा है। हालांकि, कृषि वैज्ञानिक इस विषम परिस्थिति में भी उम्मीद की किरण देख रहे हैं और उन्होंने किसानों को वैकल्पिक उपायों के साथ खेती जारी रखने की सलाह दी है।
खेती की रणनीतियों में बदलाव जरूरी
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर अच्छी वर्षा हो जाती है, तो किसान अभी भी मक्का और अरहर जैसी फसलों की बुआई कर सकते हैं। धान की खेती को लेकर भी घबराने की जरूरत नहीं है, बस तकनीक में थोड़ा बदलाव करना होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि पारंपरिक और अधिक पानी मांगने वाली किस्मों की जगह कम समय में तैयार होने वाले प्रभेदों (वैराइटीज) को अपनाकर धान की पैदावार को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है।
15 अगस्त से पहले रोपाई का महत्व
कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनोद पांडे ने स्पष्ट किया है कि यदि किसान 15 अगस्त से पहले धान की रोपाई कर लेते हैं, तो वे फसल को सुरक्षित कर सकते हैं। हालांकि, यह स्वीकार किया गया है कि सामान्य वर्षा वाले वर्षों की तुलना में उत्पादन में थोड़ी कमी आ सकती है, फिर भी यह खेती किसानों के लिए लाभ का सौदा बनी रहेगी। यदि किसी किसान ने नर्सरी तैयार नहीं की है, तो वे सीधे छींटा विधि से भी धान की बुआई कर सकते हैं। यह तरीका फसल को समय पर तैयार करने में मदद करेगा।
हाइब्रिड के बराबर उपज देने वाली किस्में
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस साल किसान लंबी अवधि वाली और अधिक पानी सोखने वाली हाइब्रिड किस्मों का मोह छोड़ दें। इसके बजाय, उन्हें कम अवधि की उन किस्मों का चयन करना चाहिए जो कम पानी में भी हाइब्रिड जैसी उपज देने का दम रखती हैं। इन प्रमुख किस्मों में शामिल हैं:
- स्वर्ण श्रेया
- वंदना
- नवीन
- अंजली
ये किस्में अमूमन 100 से 110 दिनों की अल्प अवधि में ही पूरी तरह तैयार हो जाती हैं।
क्यों बेहतर हैं ये किस्में?
ये चुनिंदा धान की किस्में विशेष रूप से मध्यम भूमि के लिए तैयार की गई हैं। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें बहुत कम सिंचाई की आवश्यकता होती है, जो पलामू जैसे कम बारिश वाले इलाकों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है। फसल जल्दी पकने के कारण किसानों को भी कम जोखिम का सामना करना पड़ता है। वैज्ञानिक प्रबंधन और सही समय पर रोपाई को अपनाकर किसान इस खरीफ सीजन में भी न केवल अपनी लागत निकालने में सफल रहेंगे, बल्कि बेहतर पैदावार से अच्छा मुनाफा भी कमा सकेंगे। वर्तमान मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए, ये कम अवधि वाली किस्में किसानों के लिए सबसे सुरक्षित और लाभकारी विकल्प हैं।
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