न यूरिया, न डीएपी और न दवा... फिर भी मिलेगी जबरदस्त उपज! जानिए खेती का देसी तरीका उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 27
खाद और दवाओं का खर्च बढ़ने के बीच प्राकृतिक खेती किसानों के लिए राहत बनकर सामने आई है। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ के मुताबिक इस तरीके से कद्दू वर्गीय सब्जियां शून्य लागत पर उगाई जा सकती हैं।

आज जब खेती-किसानी में रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर होने वाला खर्च लगातार ऊपर जा रहा है, ऐसे समय में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में उभर रही है। यह ऐसी पद्धति है, जिसमें बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अच्छी फसल लेना संभव बताया जा रहा है।

शून्य लागत में सब्जियों की खेती

फिरोजाबाद कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. विनोद प्रकाश के अनुसार, प्राकृतिक खेती की इस विधि से कद्दू वर्गीय सब्जियां उगाने पर लागत बिल्कुल शून्य आती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान को इन सब्जियों के लिए जेब से एक भी रुपया लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।

न केमिकल खाद, न जैविक खाद की जरूरत

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तरीके में बाहर से न तो किसी रासायनिक खाद की आवश्यकता होती है और न ही किसी जैविक खाद को डालने की जरूरत पड़ती है। यानी यूरिया, डीएपी या किसी दवा के बिना भी फसल तैयार की जा सकती है।

कम लागत में बेहतर मुनाफे की राह

कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि जब लागत न के बराबर रह जाती है, तो किसान भाई सब्जियों की भरपूर पैदावार लेकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। यही वजह है कि बढ़ते खर्च के दौर में प्राकृतिक खेती को किसानों के लिए वरदान माना जा रहा है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप