राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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सदन में फिर दिखा विपक्ष का जोरदार विरोध
संसद के मानसून सत्र का चौथा सप्ताह भी हंगामे की भेंट चढ़ता दिख रहा है। मंगलवार को सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी दलों के सदस्यों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। अयोध्या के राम मंदिर में कथित तौर पर चढ़ावे की चोरी होने के मुद्दे पर चर्चा की मांग और दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में विपक्षी सांसद एकजुट नजर आए।
विपक्ष की मुख्य मांग केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान से जुड़ी थी, जिसमें वे इन दोनों विषयों पर स्पष्टीकरण दें। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों के सांसदों के आक्रामक रुख के कारण सदन में हंगामा बढ़ता गया। हंगामे का आलम यह था कि सुबह 11 बजे शुरू हुई कार्यवाही महज चार मिनट के भीतर ही ठप हो गई। अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
लगातार 17वें दिन बाधित रहा कामकाज
संसद का मानसून सत्र शुरू होने के बाद से ही गतिरोध का दौर जारी है। आज लगातार 17वां ऐसा कार्यदिवस रहा जब सदन में न तो प्रश्नकाल चल सका और न ही शून्यकाल का आयोजन हो पाया। पिछले तीन सप्ताह से सदन की यही स्थिति बनी हुई है। प्रश्नकाल को संसदीय कामकाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसमें सरकार की जवाबदेही तय की जाती है, लेकिन विपक्षी हंगामे के कारण यह प्रक्रिया बार-बार बाधित हो रही है।
लोकसभा अध्यक्ष की शांति की अपील
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में मचे हंगामे के बीच विपक्षी सदस्यों से बार-बार सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सदन देश की जनता के लिए है और जनता चाहती है कि सभी महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हो। बिरला ने सदन में तख्तियां लेकर आने के तरीके पर भी सख्त ऐतराज जताया और इसे संसदीय मर्यादाओं के विपरीत बताया।
अध्यक्ष ने विपक्ष को याद दिलाया कि सोमवार को हुई कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में भी उन्होंने सभी दलों से सदन को सुचारू रूप से चलाने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने स्पष्ट किया है कि सरकार छात्रों से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री अमित शाह इस पर जवाब देने के लिए राजी हैं। जब सरकार विपक्ष की प्रमुख मांग पर सहमति जता चुकी है, तो सदन की कार्यवाही को बाधित करना उचित नहीं है।
जवाबदेही और पारदर्शिता की दुहाई
लोकसभा अध्यक्ष ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि बार-बार सदन के स्थगित होने से उन्हें मानसिक कष्ट होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रश्नकाल ही वह समय होता है जब सरकार कार्यपालिका में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और जनता के सवालों के जवाब देती है। उन्होंने कहा, मैं व्यक्तिगत रूप से कई बार आग्रह कर चुका हूं कि इस महत्वपूर्ण समय का उपयोग देशहित में चर्चा करने के लिए किया जाए। सत्तापक्ष और विपक्ष को मिलकर सदन को चलाना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में चर्चा ही समाधान का एकमात्र रास्ता है। हालांकि, विपक्षी सांसदों के शोर-शराबे के आगे अध्यक्ष की अपील का कोई असर नहीं हुआ और 11 बजकर चार मिनट पर कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
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