बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद हेलमेट बाजार में उछाल, बिक्री 70 प्रतिशत तक बढ़ी व्यापार 5 घंटे पहले 4
पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद ट्रैफिक नियमों पर बढ़ी सख्ती से हेलमेट की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जहां मई में कुछ प्रमुख कंपनियों की बिक्री में 70 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज हुई।

पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए राजनीतिक बदलाव की गूंज सिर्फ सत्ता के गलियारों तक नहीं रही, बल्कि इसका असर अब सड़कों पर भी साफ नजर आ रहा है। हेलमेट नियमों को लेकर प्रशासन की बढ़ी सख्ती ने दोपहिया वाहन चालकों की पुरानी आदतों में बड़ा बदलाव लाना शुरू कर दिया है। इसका सीधा नतीजा यह रहा कि हेलमेट की बिक्री रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। दिलचस्प बात यह है कि अब सिर्फ बाइक चलाने वाले ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए हेलमेट खरीदे जा रहे हैं।

चुनाव नतीजों के बाद बदला नजारा

राज्य में चुनाव परिणाम आने के बाद ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर प्रशासन का रवैया बेहद कड़ा हो गया है। लंबे समय से कुछ लोगों द्वारा हेलमेट नियमों के चुनिंदा पालन को लेकर शिकायतें उठती रही थीं। लेकिन अब पुलिस की सक्रियता बढ़ने के साथ ही सड़कों पर बिना हेलमेट चलने वालों की तादाद घटती दिखाई दे रही है। इसी का असर बाजार में दिख रहा है, जहां हेलमेट की मांग अचानक बहुत तेजी से बढ़ी है।

नई सरकार के गठन के बाद पुलिस ने हेलमेट न पहनने वाले चालकों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि नियम हर किसी के लिए एक समान हैं और किसी भी उल्लंघन को बख्शा नहीं जाएगा। इस बदले माहौल ने लोगों को अपनी सुरक्षा को लेकर पहले से कहीं अधिक सतर्क बना दिया है। जहां पहले कई लोग हेलमेट को महज चालान से बचने का जरिया मानते थे, वहीं अब इसे सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा समझा जाने लगा है।

कंपनियों की बिक्री में जोरदार बढ़ोतरी

ट्रैफिक सख्ती का सबसे बड़ा लाभ हेलमेट उद्योग को मिला है। बाजार से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक मई महीने में कुछ प्रमुख हेलमेट कंपनियों की बिक्री में 70 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं कई खुदरा विक्रेताओं ने बताया कि उनके यहां बिक्री में 40 से 60 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिला है। कारोबारियों का मानना है कि यह बढ़ोतरी सामान्य हालात में होने वाली सालाना बढ़त से कई गुना ज्यादा है और लंबे अरसे बाद हेलमेट की मांग इतनी तेजी से बढ़ी है।

छोटे शहरों और गांवों से बढ़ती मांग

विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मांग का बड़ा हिस्सा छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से आ रहा है। इन क्षेत्रों में पहले हेलमेट पहनने की आदत अपेक्षाकृत कम थी, मगर अब नियमों के सख्ती से लागू होने के चलते लोग बड़ी संख्या में हेलमेट खरीद रहे हैं। मुर्शिदाबाद, मालदा, आसनसोल, सिलीगुड़ी, बर्दवान और जलपाईगुड़ी जैसे शहरों में भी बिक्री में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। यह इस बात का संकेत है कि सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही।

बच्चों के हेलमेट की मांग ने भी चौंकाया

बाजार में सबसे रोचक बदलाव बच्चों के हेलमेट की मांग में नजर आया है। पहले बच्चों के लिए हेलमेट खरीदने का चलन मुख्य रूप से बड़े शहरों तक ही सीमित था, लेकिन अब छोटे शहरों और कस्बों से भी इसकी मांग बढ़ रही है। इससे साफ है कि परिवार अब सिर्फ वाहन चालक ही नहीं, बल्कि पीछे बैठने वाले बच्चों की सुरक्षा को भी गंभीरता से लेने लगे हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ इसे एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

सुरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कड़ी कार्रवाई का मकसद महज चालान काटना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करना है। आंकड़े बताते हैं कि हेलमेट पहनने से सिर की गंभीर चोटों का खतरा काफी हद तक घट जाता है। यही वजह है कि प्रशासन लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रहा है।

पश्चिम बंगाल में हेलमेट बिक्री का यह उछाल केवल व्यापारिक कामयाबी की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि लोग अब सड़क सुरक्षा को पहले से कहीं अधिक अहमियत देने लगे हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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