सौर ऊर्जा-10: 3 किलोवॉट का सोलर सिस्टम कितनी बिजली देगा, कौन से उपकरण चलेंगे और कैसे लगवाएं? जानें पूरी जानकारी व्यापार एक महीने पहले 17
सौर ऊर्जा सीरीज की आखिरी कड़ी में जानिए कि एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए पर्याप्त माने जाने वाले 3 किलोवॉट सोलर सिस्टम को लगवाने के लिए कितनी छत चाहिए और यह कैसे काम करता है। विशेषज्ञ भावना त्यागी इससे जुड़े सवालों का जवाब दे रही हैं।

सौर ऊर्जा, सोलर पैनल और सौर बिजली पर चल रही इस खास सीरीज में बीते दिनों आपने इस विषय से जुड़ी कई अहम जानकारियां हासिल कर ली होंगी। नौवीं कड़ी में बताया गया था कि केंद्र सरकार पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 3 किलोवॉट के सोलर पैनल सिस्टम पर सबसे अधिक सब्सिडी दे रही है। इतने आकार का सिस्टम एक मध्यमवर्गीय परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी माना जाता है।

इसी सिलसिले में सीरीज को शुरू से पढ़ रहे एक पाठक पी सिंह नेगी ने सवाल भेजा है, जिस पर इस महासीरीज की आखिरी स्टोरी आधारित है। उनका सवाल था कि वे अपने घर में 3 किलोवॉट का सिस्टम कैसे लगवा सकते हैं और इसकी पूरी प्रक्रिया क्या है। इस सवाल का जवाब सीईईडब्ल्यू की प्रोग्राम लीड और विशेषज्ञ भावना त्यागी दे रही हैं।

साफ बिजली का भरोसेमंद स्रोत है सौर ऊर्जा

भावना त्यागी कहती हैं कि सौर ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा है और यह स्वच्छ बिजली का स्रोत है। केंद्र और राज्य सरकारें भी इसे बढ़ावा दे रही हैं ताकि लोग बिजली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन सकें। सोलर पैनल सिस्टम को छत पर लगाया जा सकता है, जो धूप से बिजली बनाकर घर की जरूरतों को पूरा करता है। उनके मुताबिक एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए 3 किलोवॉट का सोलर पैनल सिस्टम पर्याप्त रहता है।

3 किलोवॉट सिस्टम के लिए कितनी छत जरूरी?

भावना त्यागी बताती हैं कि घर में 1 किलोवॉट का सोलर पैनल सिस्टम लगवाने के लिए कम से कम 10 वर्ग मीटर जगह चाहिए होती है। इस हिसाब से 3 किलोवॉट के सोलर सिस्टम के लिए करीब 30 वर्ग मीटर जगह की जरूरत पड़ेगी।

अगर इसे उदाहरण से समझें तो 100 वर्ग गज के घर की कुल जगह मीटर में 83 वर्ग मीटर होती है, लेकिन इसमें सोलर पैनल लगाने के लिए जगह कम बचती है। इसकी वजह यह है कि छत का बड़ा हिस्सा पानी की टंकी, सीढ़ी और छाया में चला जाता है।

ऐसे में 83 वर्ग मीटर में से आमतौर पर इस्तेमाल लायक छत का क्षेत्रफल सिर्फ 55 से 58 वर्ग मीटर ही बचता है। अगर किसी की छत पर कमरे या अन्य निर्माण भी हैं तो यह क्षेत्रफल और घट जाता है। इसी बची हुई जगह के आधार पर तय होता है कि कितने किलोवॉट का सोलर पैनल सिस्टम लगवाया जा सकता है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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