एक दिन में दो बड़ी खुशखबरी, फिर से दौड़ने को तैयार भारत की इकोनॉमी, सीधे आपकी जेब को राहत व्यापार एक महीने पहले 27
ईरान युद्ध समाप्ति की डील के बाद अब रूस भी यूक्रेन संकट खत्म करने को राजी होता दिख रहा है। दोनों मोर्चों पर शांति बनी तो तेल, खाद और रोजमर्रा की चीजों के दाम घटेंगे और भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी।

तैयार हो जाइए, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर तेज रफ्तार पकड़ने की दहलीज पर खड़ी है। एक तरफ ईरान से जुड़ा युद्ध थमता दिख रहा है, तो दूसरी ओर पांच साल से चल रहे यूक्रेन संकट के भी अंत की ओर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। ईरान में जंग खत्म करने की डील का असर तो तुरंत सामने आ गया- शेयर बाजार में उछाल आया और तेल की कीमतें नीचे आ गईं। लेकिन असली बदलाव अब आने वाला है, क्योंकि रूस ने भी यह संकेत दे दिया है कि वह किसी भी तरह यूक्रेन संकट को समाप्त करने के लिए तैयार है।

रूस से आ रही दूसरी अच्छी खबर

ईरान युद्ध थमने का नतीजा आप देख ही चुके हैं। शेयर बाजार चढ़ा हुआ है और कच्चे तेल के दाम गिरे हैं। अगर हालात ईरान के हिसाब से आगे बढ़े तो भारत सीधे ईरान से सस्ता तेल खरीद सकेगा, जिसे मंगाना भी आसान होगा। होर्मुज के खुलने का फायदा भी जगजाहिर है- इससे गैस का संकट दूर होगा।

इसी बीच रूस की ओर से भी राहत भरी खबर आ रही है, जहां युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत शुरू हो चुकी है। ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर खुद खास दूत स्टीव विटकॉफ के साथ मॉस्को पहुंचने वाले हैं। इसकी जानकारी रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दी।

हम राष्ट्रपति ट्रंप के उस प्रस्ताव का स्वागत करते हैं, जिसमें जंग खत्म करने की बात कही गई है। स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मॉस्को आ रहे हैं। हम जानना चाहते हैं कि ट्रंप के प्रस्ताव में खास क्या है। कोई यह न समझे कि रूस जंग हार रहा है, इसलिए मेज पर बैठ रहा है- हम सचमुच इस युद्ध को खत्म करने पर बात करने के लिए तैयार हैं।

लावरोव का यह बयान इसलिए अहम है, क्योंकि अब तक रूस इस तरह की प्रतिबद्धता वाली बातें नहीं कर रहा था। और अगर यह युद्ध थम गया तो इसका सबसे बड़ा लाभ भारत को मिलेगा, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, खाद बाहर से मंगाता है, खाने-पीने की कई चीजें आयात करता है और तकनीक पर भी निर्भर रहता है। इन सब पर सीधा असर पड़ेगा।

आपकी जेब पर कितना असर

ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील मिलने जा रही है, यानी ईरान और रूस दोनों का तेल अब बाजार में आएगा। आपूर्ति बढ़ेगी तो कीमतें घटेंगी। कच्चे तेल के सस्ता होने पर भारत में भी पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम कम हो सकते हैं, जिससे रुपया भी मजबूत होगा। सोमवार को ही रुपया पांच महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों में राहत दी तो भारत फिर से ईरान से तेल खरीद सकेगा और इससे उसकी मोलभाव करने की ताकत बढ़ेगी। सऊदी अरब, इराक और यूएई के साथ बेहतर सौदे संभव होंगे। रूस से अभी भी भारत को सस्ता तेल मिल रहा है, जिसकी कीमतों में और कमी आ सकती है। साथ ही अमेरिका का यह दबाव भी नहीं रहेगा कि तेल मत खरीदो। भारत को अपनी जरूरत के मुताबिक जितना तेल और गैस चाहिए, वह आसानी से रूस से ले पाएगा। सिर्फ तेल ही नहीं, भारत रूस से तरह-तरह की रक्षा तकनीक भी हासिल कर सकेगा।

किसानों को सबसे बड़ा फायदा

इस शांति का सबसे ज्यादा लाभ किसानों को मिलने वाला है। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से भारत को इस समय पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रही है। जंग खत्म होने पर उर्वरकों की आपूर्ति बढ़ेगी और बाजार में ज्यादा खाद आने से यूरिया, डीएपी तथा अन्य कीटनाशकों के दाम घट सकते हैं। रूस और बेलारूस पोटाश के बड़े निर्यातक हैं और नाइट्रोजन समेत अन्य उर्वरकों के प्रमुख आपूर्तिकर्ता भी। यूक्रेन युद्ध थमने से खाद की कीमतें कम होंगी और किसानों को राहत मिलेगी।

किचन के बजट पर राहत

रूस और यूक्रेन गेहूं, मक्का और सूरजमुखी तेल का भरपूर उत्पादन करते हैं। युद्ध शुरू होते ही इनकी आपूर्ति ठप हो गई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम चढ़ गए। जंग खत्म होने पर गेहूं और इन खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी आना तय है। खाद्य तेल की आपूर्ति भी बढ़ेगी और आम आदमी को फायदा होगा।

भारत के फूड प्रोसेसिंग उद्योग को भी इसका लाभ मिलेगा, क्योंकि भारत गेहूं और मक्का मंगाकर उसे प्रोसेस करके ब्रेड, बिस्कुट और नमकीन बनाता तथा बाजार में बेचता है। इनकी कीमतें भी घटेंगी।

रोजमर्रा की चीजें होंगी सस्ती

कच्चे तेल से बनने वाले पेट्रोकेमिकल्स से प्लास्टिक तैयार होता है। युद्ध थमने पर पानी की बोतलें, प्लास्टिक कंटेनर, फूड पैकेजिंग, पाइप, घरेलू प्लास्टिक सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स के प्लास्टिक पुर्जे सस्ते हो सकते हैं।

पॉलिएस्टर, नायलॉन और ऐक्रेलिक जैसे फाइबर भी तेल से ही बनते हैं। इसका असर रेडीमेड कपड़ों, स्पोर्ट्सवियर, स्कूल यूनिफॉर्म, बैग और जूतों की कीमतों पर पड़ सकता है और ये भी सस्ते हो सकते हैं। कई सिंथेटिक रबर उत्पाद तेल आधारित होते हैं, इसलिए टायर उद्योग, ऑटो पार्ट्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को फायदा मिल सकता है।

पेट्रोकेमिकल्स पेंट उद्योग की रीढ़ हैं। ईरान और यूक्रेन संकट खत्म होने से घरेलू पेंट, ऑटोमोबाइल पेंट, इंडस्ट्रियल कोटिंग्स, वार्निश और रेजिन के दाम घट सकते हैं, जिसका सीधा असर आपकी जेब पर होगा।

एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) भी तेल से बनता है। युद्ध समाप्त होने पर एयरलाइंस की लागत घट सकती है और हवाई टिकटों पर दबाव कम हो सकता है। इसके अलावा भारत की कई फार्मा कंपनियां पेट्रोकेमिकल आधारित रसायनों का इस्तेमाल करती हैं, इसलिए दवा निर्माण की लागत घटेगी। पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स खर्च में कमी का सीधा असर दवाओं की कीमतों पर पड़ेगा।

कमाई और नौकरियों पर असर

यूरोप भारत का बड़ा निर्यात बाजार है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोप की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ा, ऊर्जा महंगी हुई और मांग कमजोर पड़ने से नौकरियों पर संकट आया। युद्ध समाप्त होने पर यूरोप की आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे भारतीय निर्यातकों को ज्यादा ऑर्डर मिल सकते हैं। इसका लाभ टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं को मिलना तय है, जिससे रोजगार बढ़ेगा और कमाई में इजाफा होगा।

युद्ध के हालात में निवेशक पैसा लगाने से कतराते हैं। जब जंग खत्म होती है तो शेयर बाजारों में स्थिरता आती है और विदेशी निवेश बढ़ता है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी का प्रवाह तेज होता है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, इसलिए यहां निवेशकों को बड़ा फायदा मिल सकता है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप