प्याज उगाने वालों को राहत, सरकार ने न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य में किया इजाफा व्यापार एक घंटा पहले 3
केंद्र सरकार ने भंडारण योग्य गुणवत्ता वाले प्याज की न्यूनतम सुनिश्चित खरीद कीमत बढ़ाकर 1,650 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है, जो 13 जून से लागू होगी और इससे देशभर के लाखों प्याज किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

देशभर के प्याज किसानों के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला किया है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने और बाजार में कीमतों में संतुलन कायम रखने के मकसद से प्याज के न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य को बढ़ाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी और उन्हें अपनी फसल बेचने में अधिक भरोसा होगा। नई व्यवस्था 13 जून से प्रभावी हो रही है, जिससे लाखों प्याज उत्पादकों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है।

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। बीते समय में कई इलाकों से किसानों की ओर से बेहतर दाम की मांग उठ रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने खरीद प्रणाली की समीक्षा की और नई दरों को मंजूरी दी। इस कदम को किसानों की आमदनी बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूती देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

13 जून से 1,650 रुपये प्रति क्विंटल पर होगी खरीद

सरकार द्वारा किए गए संशोधन के मुताबिक अब भंडारण योग्य गुणवत्ता वाले प्याज की खरीद 1,650 रुपये प्रति क्विंटल की न्यूनतम सुनिश्चित कीमत पर की जाएगी। यह नई दर 13 जून से लागू होगी। खरीद मूल्य तय करते समय मौजूदा मंडी भाव और बाजार की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया है। सरकार चाहती है कि किसानों को कीमतों के उतार-चढ़ाव से ज्यादा नुकसान न उठाना पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम ऐसे वक्त उठाया गया है जब कई किसान अपनी फसल के लिए बेहतर दाम की उम्मीद लगाए हुए थे।

अधिकारियों के साथ बैठक में हुई गहन चर्चा

इस फैसले से पहले केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उपभोक्ता मामले विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में प्याज खरीद व्यवस्था को और प्रभावी बनाने तथा इसका लाभ किसानों तक पहुंचाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। सरकार ने खुद को केवल खरीद मूल्य बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मूल्य निर्धारण की पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक और बाजार आधारित बनाने पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने विभिन्न राज्यों की स्थिति, उत्पादन के स्तर और मंडियों में चल रहे भावों का विश्लेषण किया, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।

एमएसपी नहीं, फिर भी किसानों का सुरक्षा कवच

प्याज एक ऐसी फसल है जिसके दामों में अक्सर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। साथ ही इसे जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज भी माना जाता है। यही वजह है कि केंद्र सरकार प्याज के लिए गेहूं और धान की तरह आधिकारिक न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की घोषणा नहीं करती। इसके बजाय किसानों को संरक्षण देने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य की व्यवस्था लागू की जाती है। इस प्रणाली के जरिए जरूरत पड़ने पर सरकार किसानों से सीधी खरीद कर उन्हें गिरती कीमतों से बचाने का प्रयास करती है। नई दरों में किया गया बदलाव भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है।

किसानों की आय और बाजार संतुलन दोनों पर नजर

सरकार का मानना है कि खरीद मूल्य बढ़ने से किसानों को बेहतर आय मिलेगी और वे अपनी उपज बेचने को लेकर ज्यादा आश्वस्त महसूस करेंगे। इसके साथ ही यह कदम बाजार में कीमतों का संतुलन बनाए रखने में भी मददगार साबित हो सकता है। जब सरकार उचित दर पर खरीद करती है तो किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे कृषि क्षेत्र में स्थिरता आती है और उत्पादन को भी बढ़ावा मिलता है। जानकारों के मुताबिक यदि किसानों को लगातार बेहतर दाम मिलता रहे तो वे आगे भी प्याज की खेती को प्राथमिकता दे सकते हैं।

आगे क्या होगा असर

नई खरीद कीमत लागू होने के बाद देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों के किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों का भरोसा मजबूत होगा और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक संदेश जाएगा। 13 जून से शुरू हो रही नई व्यवस्था के तहत 1,650 रुपये प्रति क्विंटल की न्यूनतम सुनिश्चित खरीद कीमत किसानों को मजबूत सुरक्षा कवच मुहैया कराएगी। सरकार की यह पहल केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना और कृषि क्षेत्र को अधिक स्थिर बनाना भी है। ऐसे में इस फैसले को प्याज उत्पादकों के लिए एक अहम राहत पैकेज के रूप में देखा जा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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