भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक धाक, जापान की एजेंसी जेसीआर ने रेटिंग बढ़ाकर की 'ए-' व्यापार 2 घंटे पहले 5
भारत की मजबूत विकास दर से प्रभावित होकर जापान की साख निर्धारण एजेंसी जेसीआर ने भारत की रेटिंग को अपग्रेड कर दिया है। सरकार की आर्थिक नीतियों और बुनियादी ढांचे में सुधार के चलते वैश्विक स्तर पर भारत की साख में यह बड़ा इजाफा हुआ है।

भारतीय अर्थव्यवस्था का वैश्विक स्तर पर बढ़ा मान

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर पूरी दुनिया का नज़रिया सकारात्मक हो गया है। जून तिमाही के ताजा आंकड़ों के जारी होने के बाद वैश्विक स्तर पर भारत के आर्थिक रुतबे में इजाफा हुआ है। जापान की प्रतिष्ठित साख निर्धारण एजेंसी जेसीआर ने भारत की रेटिंग में सुधार करते हुए इसे एक पायदान ऊपर कर दिया है। जेसीआर ने स्थिर परिदृश्य के साथ भारत की साख को 'ए-' के स्तर पर अपग्रेड किया है। इस रेटिंग में बदलाव के पीछे एजेंसी ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और वित्तीय प्रणाली में आई मजबूती को मुख्य आधार बताया है।

जेसीआर ने क्यों बढ़ाया भारत का भरोसा

जापान की एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि 140 करोड़ से ज्यादा की आबादी और वर्तमान मूल्य पर 3.9 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी वाली भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 6 फीसदी से अधिक की विकास दर बरकरार रखने में सक्षम है। एजेंसी का मानना है कि निजी स्तर पर खपत और सार्वजनिक निवेश के दम पर भारत पिछले कुछ वर्षों से करीब 7 फीसदी की ऊंची विकास दर को बनाए रखने में सफल रहा है।

एजेंसी ने भारत सरकार द्वारा अपनाई गई उन नीतियों की भी सराहना की है जिन्होंने उत्पादकता और विकास को रफ्तार दी है। इनमें डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का विस्तार और वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी को लागू करना प्रमुख है। इन सुधारों ने देश की आर्थिक बुनियाद को और ज्यादा ठोस बनाया है।

वित्तीय प्रणाली में सुधार और मजबूती

जेसीआर ने अपने मूल्यांकन में गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्रों की स्थितियों में हुए सुधार का भी जिक्र किया है। एजेंसी का मानना है कि बीते कुछ वर्षों के दौरान भारत की वित्तीय प्रणाली की मजबूती में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा में भारत की दीर्घकालिक साख को 'ए-' करने के पीछे यही मजबूत आर्थिक बुनियाद और नीतियों की दक्षता प्रमुख कारण रही है।

इससे पहले जेसीआर ने भारत को 'बीबीबी+' रेटिंग प्रदान की थी। वित्तीय जगत में 'ए' रेटिंग को वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के उच्च स्तर के विश्वास का प्रतीक माना जाता है। गौरतलब है कि पिछले ही महीने वैश्विक स्तर की दो अन्य रेटिंग एजेंसियां, एसएंडपी और फिच ने भी भारत की निवेश-ग्रेड रेटिंग को बरकरार रखा था, जिसके पीछे उन्होंने देश की गतिशील अर्थव्यवस्था, नीतिगत स्थिरता और इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश को मुख्य वजह बताया था।

विकास दर के ताजा आंकड़े

भारत की आर्थिक विकास दर वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 फीसदी दर्ज की गई, जो कि भारतीय रिजर्व बैंक के 7 फीसदी के अनुमान से कहीं अधिक रही है। इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 फीसदी ही रही थी। यह आंकड़े भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत का प्रमाण हैं।

चुनौतियों पर एजेंसी की नज़र

हालांकि जेसीआर ने अपनी रिपोर्ट में भारत के सामने मौजूद कुछ संरचनात्मक चुनौतियों का भी स्पष्ट उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, राजकोषीय घाटे का उच्च स्तर बने रहना, राज्यों के बीच आर्थिक असमानता दूर करने के लिए वित्तीय हस्तांतरण की व्यवस्था और चुनावी माहौल के दौरान राजकोषीय प्रबंधन की संवेदनशीलता जैसे कुछ बिंदु अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियां बने हुए हैं जिन पर सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है।

कर्ज प्रबंधन का सरकारी लक्ष्य

सरकार की तरफ से कर्ज को नियंत्रित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। एजेंसी ने कहा कि हाल के वर्षों में सरकार ने सब्सिडी जैसे खर्चों पर नियंत्रण रखा है और पूंजीगत व्यय यानी बुनियादी ढांचे में निवेश को अधिक प्राथमिकता दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में कर्ज-जीडीपी अनुपात को 55.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जो कि वित्त वर्ष 2025-26 के 56.1 फीसदी से कम है।

सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2031 तक इस अनुपात को घटाकर 50 फीसदी के स्तर पर लाया जाए। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 फीसदी यानी 16.96 लाख करोड़ रुपये रहने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, इस वित्त वर्ष के लिए सकल बाजार उधारी का लक्ष्य 16.09 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध उधारी का लक्ष्य 11.73 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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