एचडीएफसी बैंक ने राजीव कुमार को चुना चेयरमैन, तो सोशल मीडिया पर क्‍यों मचा बवाल? व्यापार एक महीने पहले 64
देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को अपना नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त करने का ऐलान किया है, जिसके बाद इंटरनेट पर तीखी आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया है।

एचडीएफसी बैंक का बड़ा फैसला और सोशल मीडिया पर घमासान

देश के सबसे बड़े निजी बैंक, एचडीएफसी बैंक ने हाल ही में एक ऐसा फैसला लिया है जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। बैंक ने अपने नए पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार के नाम का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद से ही इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की ओर से कड़ी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। ऐसा लगता है कि बैंक का यह निर्णय आम लोगों और वित्तीय विशेषज्ञों की कसौटी पर खरा नहीं उतर पा रहा है। अक्सर कहा जाता है कि जब समय विपरीत हो, तो सही निर्णय भी गलत साबित होने लगते हैं। एचडीएफसी बैंक के साथ भी फिलहाल कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है। अपने दो बड़े व्यवसायों के विलय के बाद से ही बैंक लगातार किसी न किसी विवाद में घिरा रहता है। अब इस नई नियुक्ति ने आग में घी डालने का काम किया है।

कौन हैं राजीव कुमार और विवाद की मुख्य वजह क्या है?

राजीव कुमार 1984 बैच के आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। चुनाव आयुक्त के पद पर कार्य करने के अलावा, उन्होंने देश के वित्त सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी संभाली है। उनके पास करीब 40 साल का लंबा प्रशासनिक अनुभव है, जिसमें उन्होंने जन-केंद्रित नीतियों और वित्तीय क्षेत्र में सुधार लाने के लिए काम किया है। साल 2024 में लोकसभा चुनाव भी उन्हीं की देखरेख में संपन्न हुए थे। बैंक ने 29 जून को यह घोषणा की कि वे राजीव कुमार को 4 साल की अवधि के लिए पार्ट-टाइम चेयरमैन के पद पर नियुक्त करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, इस नियुक्ति के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की अंतिम स्वीकृति अभी बाकी है, लेकिन उससे पहले ही सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं

जैसे ही राजीव कुमार का नाम सामने आया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसे लेकर आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया। यूजर्स ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए बैंक की कार्यशैली पर कटाक्ष किए हैं। मनीष नाम के एक यूजर ने तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा कि जिस तरह से राजीव कुमार ने चुनाव आयोग की कमान संभाली थी, अब वे बैंक के कामकाज को भी उसी तरह देखेंगे। उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग इस बैंक में पैसा जमा रखते हैं, उन्हें अब अपनी बचत की चिंता शुरू कर देनी चाहिए, क्योंकि बैंक ने विशेषज्ञों को छोड़कर एक विवादास्पद फैसला लिया है।

रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी ने उठाए सवाल

इस पूरे मामले में रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने बैंक के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में कई ऐसे अनुभवी दिग्गज मौजूद थे जो इस संस्थान को पेशेवर तरीके से संभाल सकते थे और उसकी समस्याओं को दूर कर सकते थे। इसके विपरीत, बैंक ने एक ऐसे पूर्व सिविल सर्वेंट को चुन लिया, जिनका बैंकिंग बैकग्राउंड से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नियुक्ति पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित लगती है। उनका मानना है कि एक तरफ चुनाव आयुक्त के रूप में उनके पिछले कार्यकाल का प्रभाव है, तो दूसरी तरफ सरकार का देश के सबसे बड़े निजी बैंक पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण बनाए रखने का प्रयास भी इसमें दिखाई दे रहा है।

नियुक्ति पर उठते गंभीर सवाल

इंटरनेट पर यूजर्स इस बात को लेकर भी नाराज हैं कि बैंक ने अनुभवी बैंकर्स को दरकिनार क्यों किया। विजपुनीत नाम के एक अन्य यूजर ने सवाल किया कि क्या बैंक को कोई योग्य बैंकर नहीं मिला? मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में उनके विवादास्पद कार्यकाल का हवाला देते हुए यूजर्स का कहना है कि इतने बड़े संस्थान का मुखिया किसी ऐसे व्यक्ति को बनाना, जो विवादों में रहा हो, किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है।

वेतन और पेंशन का गणित

सोशल मीडिया पर केवल उनकी कार्यक्षमता ही नहीं, बल्कि उनके वित्तीय लाभ को लेकर भी चर्चा हो रही है। कपिल नाम के एक सत्यापित यूजर ने जानकारी दी कि राजीव कुमार को पेंशन के रूप में 1.5 लाख रुपये मिलेंगे और एचडीएफसी बैंक के गैर-कार्यकारी चेयरमैन पद के लिए 3 लाख रुपये का वेतन दिया जाएगा। इस प्रकार, उन्हें प्रतिमाह कुल 4.5 लाख रुपये की आय प्राप्त होगी। लोग अब इसे एक प्रशासनिक सेटअप और निजी क्षेत्र के बीच एक विवादास्पद गठबंधन के रूप में देख रहे हैं।

बैंक का आधिकारिक रुख

एचडीएफसी बैंक ने अपने बचाव में यह स्पष्ट किया है कि उसके बोर्ड ने राजीव कुमार को 4 साल के लिए निदेशक के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी है, जिसमें से वे 3 साल तक पार्ट-टाइम चेयरमैन के पद पर बने रहेंगे। बैंक का मानना है कि उनका प्रशासनिक अनुभव बैंक के भविष्य के लिए मददगार साबित होगा। हालांकि, बैंक का यह तर्क सोशल मीडिया पर सक्रिय जनता को संतुष्ट करता नहीं दिख रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि रिजर्व बैंक इस पर क्या निर्णय लेता है और बैंक की छवि पर इसका क्या असर पड़ता है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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