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3 घंटे पहले
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देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं ये 9 सेक्टर
भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने में विभिन्न उद्योगों की बड़ी भूमिका रहती है, लेकिन इनमें से 9 ऐसे उद्योग हैं जिन्हें देश के औद्योगिक जगत की बुनियाद माना जाता है। पूरे देश के कारोबारी परिदृश्य में इन 9 बुनियादी उद्योगों की हिस्सेदारी 70 फीसदी से भी अधिक है। यही कारण है कि देश की आर्थिक सेहत का आकलन करने के लिए इन क्षेत्रों के उत्पादन आंकड़ों पर सरकार और बाजार विशेषज्ञों की विशेष नजर रहती है। हाल ही में जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के महीने में इन बुनियादी उद्योगों की विकास दर में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले शानदार तेजी देखी गई है और यह रफ्तार करीब दोगुनी रही है।
जुलाई में 5.4 फीसदी रही ग्रोथ
सरकार द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई महीने में इन 9 बुनियादी उद्योगों की ग्रोथ रेट बढ़कर 5.4 फीसदी तक पहुंच गई है। यदि हम पिछले साल जुलाई के आंकड़ों पर नजर डालें, तो उस समय यह वृद्धि दर केवल 3.2 फीसदी दर्ज की गई थी। इस विकास दर को बढ़ाने में कोयला, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद, बिजली, सीमेंट और लौह अयस्क के उत्पादन में हुई बढ़ोतरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, जून के महीने में दर्ज की गई 6 फीसदी की विकास दर की तुलना में जुलाई के आंकड़े थोड़े सुस्त जरूर नजर आ रहे हैं, लेकिन वार्षिक आधार पर यह सुधार काफी उल्लेखनीय है।
बदल गया है आधार वर्ष और सेक्टर की संख्या
इस बार के आंकड़ों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय अब इन आंकड़ों को 2022-23 के नए आधार वर्ष के साथ जारी कर रहा है, जबकि पहले इन्हें 2011-12 के आधार वर्ष पर मापा जाता था। इसके अलावा, सरकार ने बुनियादी उद्योगों की सूची में लौह अयस्क को भी शामिल कर लिया है, जिसके बाद अब कुल उद्योगों की संख्या 8 से बढ़कर 9 हो गई है। जून 2026 तक सरकार केवल 8 बुनियादी उद्योगों के आंकड़े ही पेश करती थी, लेकिन अब व्यापक तस्वीर दिखाने के लिए 9 उद्योगों को सूचकांक का हिस्सा बनाया गया है।
किन क्षेत्रों में दिखी गिरावट और सुस्ती
जुलाई महीने के प्रदर्शन का विश्लेषण करें तो मिलाजुला रुख दिखाई देता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कच्चे तेल, उर्वरक और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, इस्पात उत्पादन की वृद्धि दर भी काफी धीमी होकर 2.9 फीसदी पर सिमट गई है, जबकि जुलाई 2025 में यह आंकड़ा 15.7 फीसदी के उच्च स्तर पर था। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत के अनुसार, उर्वरक, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस जैसे सेक्टर, जो बुनियादी उद्योगों में लगभग 14 फीसदी की हिस्सेदारी रखते हैं, उनमें लगातार कमजोरी बनी हुई है। हालांकि, मासिक आधार पर प्राकृतिक गैस उत्पादन की गिरावट में थोड़ी राहत जरूर मिली है।
आगे की चाल और विशेषज्ञों का अनुमान
अगस्त के महीने में इन बुनियादी उद्योगों की रफ्तार और अधिक नरम पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सूचकांक में 53.4 फीसदी का बड़ा योगदान रखने वाले लौह अयस्क, बिजली और इस्पात क्षेत्र की वृद्धि दर में जून के मुकाबले नरमी देखी गई है। देवेंद्र पंत का मानना है कि बेस इफेक्ट यानी आधार प्रभाव के कारण अगस्त महीने में उत्पादन वृद्धि 5 फीसदी से भी नीचे जा सकती है। इसी तरह, रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने अनुमान जताया है कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी IIP में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। उनके मुताबिक, जून में रही 7.3 फीसदी की दर घटकर जुलाई में 6 फीसदी से 6.5 फीसदी के बीच रह सकती है। चालू वित्त वर्ष की बात करें, तो अप्रैल-जुलाई 2026 के बीच इन 9 क्षेत्रों का कुल उत्पादन 4.3 फीसदी बढ़ा है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 1.5 फीसदी की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन है।
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