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एक घंटा पहले
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देश की अर्थव्यवस्था के सामने एक नई मुश्किल खड़ी होती दिख रही है। भारी आयात बिल और सब्सिडी से पहले ही जूझ रही सरकार के सामने अब राजकोषीय घाटे की चुनौती और गहरी होने वाली है। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों का कहना है कि चालू वित्तवर्ष में सरकार के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य और ऊपर जा सकता है, क्योंकि ईरान युद्ध के कारण आयात बिल और सब्सिडी पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।
एक ओर सरकार बढ़ते आयात बिल पर लगाम कसने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर रुपये में जारी कमजोरी और भारी-भरकम सब्सिडी उस पर बोझ बढ़ाती जा रही है। इसी बीच यह खबर सामने आई है कि घाटे को नियंत्रित करने की चुनौती और बड़ी होने वाली है।
अनुमान से बड़े घाटे की तैयारी
ब्लूमबर्ग ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया है कि सरकार इस साल अनुमान से ज्यादा बड़े बजट घाटे के लिए कमर कस रही है। ईरान में चल रहे युद्ध के चलते ईंधन सब्सिडी की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर सरकार की वित्तीय सेहत पर पड़ा है।
समाचार एजेंसी रॉयटर ने भी ब्लूमबर्ग के हवाले से बताया है कि दुनिया में तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक और उपभोक्ता देश भारत, इस वित्तवर्ष बजट घाटे को 4.3% के लक्ष्य के मुकाबले 4.8% तक जाने देने के लिए तैयार है। यह राजकोषीय घाटा 1 अप्रैल से शुरू हुए वित्तवर्ष के लिए होगा। पिछले बजट में सरकार ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया था, जिसे अब बढ़ाकर 4.8 फीसदी किया जा सकता है।
क्यों गहरा रही है मुश्किल
कच्चे तेल के दाम चढ़ने और होरमुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद आपूर्ति में रुकावट आई है, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है। इसी वजह से सरकारी रिटेलर्स ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 8% की बढ़ोतरी कर दी है। साथ ही सरकार ने घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी में भी कटौती की है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 90% तेल आयात करता है और वह उन देशों में शामिल है, जो ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक पड़ने वाली बाधा से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
उर्वरक सब्सिडी में 20% इजाफे का अनुमान
सरकार के एक अधिकारी ने पहले बताया था कि इस वित्तवर्ष में उर्वरक सब्सिडी में 20% की बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल सरकार ने सभी विकल्प खुले रखे हैं और इस साल बाद में जब गैर-कर राजस्व तथा सब्सिडी की जरूरतों को लेकर तस्वीर साफ होगी, तब वित्तीय स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी।
खर्च में कटौती के विकल्प पर भी नजर
घाटे पर काबू पाने के लिए सरकार विभिन्न मंत्रालयों में खर्च घटाने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। इसका मतलब यह है कि सरकारी खर्च में कमी लाकर भी घाटे को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
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