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2 घंटे पहले
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रूसी तेल पर ट्रंप का बड़ा फैसला
भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंधों के मामले में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी कच्चे तेल के आयात पर लगे कड़े टैरिफ और पाबंदियों को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस फैसले ने भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के लिए रूस से तेल खरीदने की सभी बाधाओं को हटा दिया है। जानकारों का मानना है कि इस कदम से भारत की ऊर्जा सुरक्षा में काफी मजबूती आएगी। अनुमान है कि आने वाले समय में भारत रूस से रोजाना करीब 28.62 करोड़ लीटर कच्चा तेल खरीदने की तैयारी कर रहा है। यह मात्रा इतनी अधिक है कि अकेले दिल्ली जैसे महानगर की ईंधन जरूरतों को लगातार 40 दिनों तक पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
प्रतिबंधों के हटने का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ के तहत लगाए गए शुल्कों को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इस नीतिगत बदलाव का सीधा असर भारतीय तेल बाजार पर पड़ेगा। हालांकि, यह छूट वैश्विक स्तर पर दी गई है और इसका लाभ चीन जैसे अन्य देश भी उठा सकते हैं, लेकिन वर्तमान में भारत रूसी कच्चे तेल का दुनिया में सबसे बड़ा आयातक है। इसलिए इस निर्णय का सबसे अधिक और प्रत्यक्ष लाभ भारत को ही मिलने की उम्मीद है। एक बैरल में करीब 159 लीटर तेल होता है और भारत अब बड़े पैमाने पर समुद्री मार्ग से आयात की प्रक्रिया को और तेज करेगा।
भारत बना सबसे बड़ा आयातक
जहाजों की आवाजाही और समुद्री आंकड़ों पर नजर रखने वाली एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस साल रूसी तेल का सबसे बड़ा ग्राहक बना हुआ है। भारत वर्तमान में औसतन 18 लाख बैरल प्रतिदिन (BPD) के हिसाब से समुद्री मार्ग से तेल मंगवा रहा है, जो चीन के 12 लाख BPD के आयात से कहीं अधिक है। रूस से तेल लेने वाले देशों की सूची में भारत के बाद इटली, तुर्किये और नीदरलैंड जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। ऊर्जा शोध संस्था केपलर के विशेषज्ञों का अनुमान है कि अक्टूबर महीने के दौरान भारत का आयात 18 से 19 लाख BPD के दायरे में बना रहेगा। हालांकि, यह मात्रा पिछले कुछ महीनों के रिकॉर्ड स्तर से कम है, क्योंकि भारत ने जून में 26 लाख BPD और जुलाई में 25.7 लाख BPD तक का रिकॉर्ड आयात किया था।
रिफाइनरी कंपनियों को बड़ी राहत
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा का कहना है कि अमेरिका का नया विधेयक भारत के लिए एक बड़ी राहत है। यदि ट्रंप का यह फैसला नहीं आता, तो भारत को 100 फीसदी तक के संभावित शुल्कों का सामना करना पड़ सकता था, क्योंकि भारत रूसी तेल खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों में शुमार है। इस छूट ने भारतीय रिफाइनरियों को बड़ी राहत दी है, जिससे अब वे बेझिझक रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रख सकेंगी। हालांकि, भविष्य में अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद यदि ट्रंप का रुख बदलता है, तो स्थिति फिर से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए भारतीय रिफाइनरी कंपनियां फिलहाल अपनी इन्वेंटरी और भंडार को तेजी से बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
दिल्ली की जरूरतों के आधार पर विश्लेषण
यदि हम दिल्ली के संदर्भ में ईंधन की खपत का गणित देखें, तो यह आंकड़ा काफी प्रभावशाली है। दिल्ली में रोजाना ईंधन की कुल खपत लगभग 72 लाख लीटर है, जिसमें पेट्रोल की खपत 34.7 लाख लीटर और डीजल की खपत 37.7 लाख लीटर के आसपास रहती है। भारत द्वारा रूस से मंगाई जा रही रोजाना 28.62 करोड़ लीटर की खेप की तुलना यदि दिल्ली की दैनिक जरूरतों से की जाए, तो एक दिन का आयात दिल्ली जैसे बड़े शहर के लिए 40 दिन का ईंधन भंडार तैयार करने के लिए सक्षम है। यदि भारतीय कंपनियां अपना आयात इसी तरह बनाए रखती हैं या इसे और अधिक बढ़ाती हैं, तो देश में कच्चे तेल का एक बड़ा और सुरक्षित रणनीतिक भंडार बनाया जा सकेगा, जो किसी भी वैश्विक संकट के समय भारत की रक्षा करेगा।
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