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एक घंटा पहले
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भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे से राहत भरी खबर सामने आई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व एक बार फिर बढ़कर 682.32 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से शुक्रवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 29 मई, 2026 को समाप्त हुए हफ्ते में इस भंडार में 93.8 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इससे ठीक एक हफ्ते पहले यह भंडार 7.51 अरब डॉलर की गिरावट के साथ 681.38 अरब डॉलर पर आ गया था। गौरतलब है कि इस साल 27 फरवरी को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये पर बने दबाव के चलते कई हफ्तों तक इसमें कमी देखने को मिली।
फॉरेन करेंसी एसेट्स में 3.12 अरब डॉलर की बढ़त
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 29 मई को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे अहम हिस्सा माने जाने वाली फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) 3.12 अरब डॉलर बढ़कर 546.15 अरब डॉलर हो गईं। डॉलर के रूप में आंकी जाने वाली एफसीए में यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य विदेशी मुद्राओं के मूल्य में होने वाली घट-बढ़ का असर भी शामिल रहता है।
गोल्ड रिजर्व में आई कमी
आंकड़ों के मुताबिक, समीक्षाधीन हफ्ते में स्वर्ण भंडार 2.18 अरब डॉलर घटकर 112.6 अरब डॉलर रह गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में देश का विशेष आहरण अधिकार (SDR) 18.75 अरब डॉलर पर अपरिवर्तित बना रहा। वहीं इस हफ्ते आईएमएफ में भारत का आरक्षित भंडार 80 लाख डॉलर बढ़कर 4.82 अरब डॉलर हो गया।
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों है अहम
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती और स्थिरता को मापने का एक अहम पैमाना होता है। यह एक तरह के आर्थिक सुरक्षा कवच की भूमिका निभाता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की साख को मजबूत करता है।
फॉरेक्स रिजर्व के प्रमुख फायदे
- आयात के भुगतान में सहूलियत
- रुपये की कीमत को स्थिर बनाए रखना
- आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच
- विदेशी कर्ज चुकाने की क्षमता में मजबूती
- विदेशी निवेशकों के भरोसे में बढ़ोतरी
- आपातकालीन हालात में आर्थिक सहारा
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