रूस से तेल आयात पर ट्रंप प्रशासन की बड़ी राहत: 60 दिनों की छूट का भारत के लिए क्या है महत्व? व्यापार एक घंटा पहले 9
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों के लिए 100 फीसदी टैरिफ के नियम में 60 दिनों की अस्थायी छूट देने का बड़ा फैसला किया है, जिससे भारत को बड़ी राहत मिली है।

अमेरिकी सरकार ने टैरिफ नियम में दी ढील

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन तमाम देशों को एक बड़ी राहत दी है जो रूस से कच्चा तेल आयात करते हैं। इसमें भारत जैसे प्रमुख देश भी शामिल हैं। दरअसल, पहले अमेरिका ने रूसी क्रूड ऑयल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक का भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। अब इस फैसले पर अस्थायी रोक लगाकर ट्रंप प्रशासन ने एक तरह की बड़ी रियायत दी है। ट्रंप ने ग्राहम एक्ट यानी 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' के कुछ कड़े प्रावधानों को कम से कम 60 दिनों के लिए निलंबित करने का निर्णय लिया है।

कानूनी स्थिति और 60 दिनों की अवधि

अमेरिका ने हाल ही में ग्राहम एक्ट को पारित किया था, जिसके तहत रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीदारी करने वाले दुनिया के 5 बड़े देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी थी। यह नियम आधिकारिक तौर पर 18 अक्टूबर से लागू होने वाला था, लेकिन इसे प्रभावी होने से ठीक एक दिन पहले ट्रंप प्रशासन ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए इसे टाल दिया है। हालांकि सरकारी तौर पर इसे 60 दिनों की समीक्षा अवधि का नाम दिया गया है, लेकिन हस्ताक्षरित आदेश यह भी स्पष्ट करता है कि यह छूट तब तक जारी रह सकती है जब तक कि राष्ट्रपति या विदेश मंत्री स्वयं कोई नई कार्रवाई तय न कर लें। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिए हैं कि जब तक प्रशासन अगला कदम नहीं उठाता, तब तक यह राहत बरकरार रहेगी।

वॉशिंगटन में फैसले का भारी विरोध

ट्रंप का यह फैसला अमेरिका के भीतर ही काफी विवाद का कारण बन गया है। वॉशिंगटन में सत्ता के गलियारों में इसे लेकर भारी खींचतान चल रही है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद इस रोक के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि रूस पर आर्थिक दबाव कम करने से मॉस्को को मिल रही सैन्य फंडिंग को रोकने के पश्चिमी देशों के प्रयासों को झटका लगा है। मैसाचुसेट्स की डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कांग्रेस की राय को दरकिनार किया है और रूसी आक्रामकता को बढ़ावा देने का काम किया है। उन्होंने इस फैसले को तत्काल पलटने की मांग की है। उधर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी इस फैसले की तीखी आलोचना की है। उनका मानना है कि प्रतिबंधों में इस प्रकार की ढील सीधे तौर पर रूस को फायदा पहुंचाने वाली है।

भारत के लिए इस छूट के क्या मायने हैं?

अमेरिकी प्रशासन के इस कदम का भारतीय अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • तत्काल टैरिफ से राहत: भारत को अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले संभावित अतिरिक्त टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों से बड़ी राहत मिल गई है। समय-सीमा करीब आने के कारण जो खतरा मंडरा रहा था, वह फिलहाल टल गया है।
  • ऊर्जा आयात की सुरक्षा: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि भारत ने ऊर्जा के नए स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है, लेकिन अपनी अर्थव्यवस्था को सुचारू रखने के लिए भारत रातों-रात रूसी तेल से पूरी तरह दूरी नहीं बना सकता। इस छूट से भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल लेना जारी रखने का अवसर मिल गया है।
  • वैश्विक बाजार में स्थिरता: अमेरिका का यह फैसला कहीं न कहीं वैश्विक स्तर पर ईंधन की आपूर्ति में आ रही बाधाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। ईरान से जुड़े तनाव, लाल सागर में हूती हमले और यूक्रेन का युद्ध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में रूसी तेल पर अचानक पूरी तरह रोक लगाना वैश्विक कीमतों में भारी उछाल ला सकता था।
  • ट्रेड डील पर असर: यह निर्णय दर्शाता है कि अमेरिका फिलहाल वैश्विक व्यापार को लेकर थोड़ा नरम रुख अपना रहा है। इसका सीधा असर भविष्य में भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौतों पर भी सकारात्मक रूप में पड़ सकता है।

भविष्य को लेकर अनिश्चितता

हालांकि यह राहत भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद है, लेकिन ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) और बाजार के जानकारों का मानना है कि इसे कोई स्थायी समाधान नहीं माना जाना चाहिए। विश्लेषकों के अनुसार, यह एक अस्थायी और वापस ली जा सकने वाली सुविधा है। 60 दिनों की समीक्षा अवधि पूरी होने के बाद स्थिति फिर से बदल सकती है। अमेरिकी प्रशासन के पास किसी भी समय इन शुल्कों को फिर से लागू करने का अधिकार सुरक्षित है। ऐसे में भारतीय ऊर्जा आयातकों के लिए नीतिगत अनिश्चितता अब भी बनी हुई है, जिससे भविष्य में फिर से संकट पैदा होने की आशंका बनी रहेगी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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