पाकिस्तान की दोहरी चाल: ईरान के साथ दोस्ती का दावा, लेकिन सीमा पर बिछाया जाल विश्व 4 घंटे पहले 6
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान की संदिग्ध भूमिका सामने आई है। एक ओर पाकिस्तान मध्यस्थता की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर उसने ईरान के साथ अपनी सीमाएं सील कर दी हैं।

पाकिस्तान की बदलती कूटनीति पर सवाल

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं। कभी ईरान के हितों की वकालत करने वाला पाकिस्तान अब खुद उसी देश की सीमा पर घेराबंदी करता नजर आ रहा है। यह स्थिति तब बनी है जब मध्य-पूर्व में हालात बेहद नाजुक हैं और हर कदम एक बड़े युद्ध की आहट दे रहा है। पाकिस्तान की यह दोहरी नीति न केवल ईरान के लिए घातक साबित हो सकती है, बल्कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता को भी बढ़ावा दे रही है।

अरब सागर में अमेरिकी मौजूदगी और बढ़ता संदेह

एक ओर पाकिस्तान की सीमाएं बंद हैं, तो दूसरी ओर अरब सागर में अमेरिकी नौसेना की हलचल ने तनाव बढ़ा दिया है। ईरानी तट के निकट अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और डिस्ट्रॉयर की मौजूदगी यह संकेत देती है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का दायरा बढ़ सकता है। हूतियों और सऊदी अरब के बीच जारी संघर्ष के इस दौर में, पाकिस्तानी जलसीमा के करीब इन युद्धपोतों का पहुंचना किसी बड़े रणनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। सवाल यह है कि जिस देश ने शांति दूत बनने का दावा किया, वह अब खुद अमेरिका के लिए एक सुरक्षित ठिकाना क्यों बन रहा है?

सीमा क्यों की गई बंद?

16 अक्टूबर को पाकिस्तान ने एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए गब्द-रिमदान और तफ्तान सीमा चौकियों को व्यापारिक गतिविधियों के लिए बंद कर दिया। इस बारे में आधिकारिक बयानों में तकनीकी खामियों और सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई के अनुसार, दोनों देशों के अधिकारी इन मुद्दों पर लगातार बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक तर्क तस्करी और आतंकवाद पर नियंत्रण का दिया जा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इसे पाकिस्तान द्वारा ईरान के खिलाफ रची गई एक सोची-समझी साजिश के रूप में देख रहे हैं।

भविष्य के लिए खतरा

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के दावों के विपरीत, जमीन पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। पाकिस्तान ने जिस तरह से ईरान के साथ व्यापार और आवाजाही को ठप किया है, वह उसकी निष्ठा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। एक तरफ भाईचारा निभाने का दिखावा और दूसरी तरफ ईरान की घेराबंदी में अमेरिका का साथ देना, पाकिस्तान के असली इरादों को उजागर करता है। यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो आने वाले समय में सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका है, जो पहले से ही एक संवेदनशील दौर से गुजर रहा है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप