सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट, कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंचे भाव व्यापार एक महीने पहले 63
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी के दाम धड़ाम हो गए हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के चलते ये कीमती धातुएं कई महीनों के निचले स्तर पर आ गई हैं।

कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट

सोना और चांदी खरीदने का प्लान बना रहे लोगों के लिए राहत की बात है, क्योंकि बाजार में इनकी कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को घरेलू और वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी की चमक फीकी पड़ गई, जिससे ये कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। इस गिरावट के पीछे सबसे मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की प्रबल आशंका है।

MCX पर सोना और चांदी का हाल

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार को कारोबार के दौरान कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखी गई। आंकड़ों के अनुसार:

  • जुलाई डिलीवरी वाली चांदी की कीमत 3.9% या करीब 8,829 रुपये गिरकर 2,17,005 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई।
  • अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना 3.8% यानी करीब 5,601 रुपये फिसलकर 1,40,928 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।

इंटरनेशनल मार्केट में भी दिखा असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स (COMEX) में भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। सोना 169 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस की गिरावट के साथ 3,980 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर कारोबार कर रहा है। उल्लेखनीय है कि नवंबर के बाद यह पहला मौका है जब सोना 4,000 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आया है। जून महीने में अब तक सोने में करीब 13 फीसदी की गिरावट आ चुकी है, जो पिछले एक दशक की सबसे बड़ी मासिक गिरावट हो सकती है। वहीं, चांदी भी कॉमेक्स में करीब 4 डॉलर गिरकर 58 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है, जो दिसंबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

क्यों गिर रहे हैं दाम

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और डॉलर में लगातार मजबूती ने सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। बाजार में यह चिंता है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने जैसी संपत्ति से दूरी बनाने लगते हैं, क्योंकि इसमें कोई ब्याज नहीं मिलता है। फरवरी के अंत से लेकर अब तक चांदी करीब 38 फीसदी और सोना लगभग 24 फीसदी तक टूट चुका है।

आगे की स्थिति

बाजार जानकारों के मुताबिक, जब तक अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और फेडरल रिजर्व का रुख स्पष्ट नहीं होता, तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट निवेश का एक अच्छा अवसर भी साबित हो सकती है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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