व्यापार
एक महीने पहले
65
विचारों
एनर्जी ड्रिंक के दावों पर सवाल
अगर आप अक्सर बाजार से स्टिंग, रेड बुल या अन्य इसी तरह के ड्रिंक्स खरीदते हैं, तो आपने उन पर बड़े अक्षरों में एनर्जी ड्रिंक लिखा हुआ जरूर देखा होगा। अब इसी नाम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने अब इन ड्रिंक्स की मार्केटिंग और लेबलिंग पर कड़ी आपत्ति जताई है। नियामक ने पेप्सिको और रेड बुल जैसी बड़ी कंपनियों को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब-तलब किया है।
भारत में नहीं है ऐसी कोई श्रेणी
नियामक के अनुसार, भारतीय खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत एनर्जी ड्रिंक नाम की कोई आधिकारिक फूड कैटेगरी मौजूद ही नहीं है। FSSAI का स्पष्ट कहना है कि कंपनियां अपने किसी भी उत्पाद पर इस तरह के दावे नहीं कर सकतीं कि उनका सेवन करने से शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है। नियामक ने यह भी साफ किया है कि फूड कैटेगरी सिस्टम का उद्देश्य केवल प्रशासनिक वर्गीकरण करना है, न कि उसे कंपनियों को अपनी मार्केटिंग या उत्पाद के लेबल पर दावे करने की छूट देना है।
नियमों का उल्लंघन और कानूनी पेच
इस पूरे मामले की जड़ में लेबल पर लिखा एनर्जी ड्रिंक शब्द है। प्राधिकरण का तर्क है कि कोई भी खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ इस तरह का दावा नहीं कर सकता कि वह शरीर की ऊर्जा को बढ़ाता है या शारीरिक कमजोरी को दूर करने में सक्षम है। ऐसे दावे करना Food Safety and Standards Act, 2006 के प्रावधानों और उससे जुड़े नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। प्राधिकरण के अनुसार, इस तरह के उत्पादों पर चिकित्सीय असर या ऊर्जा बढ़ाने के दावे करना कानूनन मान्य नहीं है।
कंपनियों को देना होगा जवाब
नियामक ने नोटिस के जरिए कंपनियों से सवाल किया है कि जब कानून में ऐसे किसी दावे को करने की इजाजत नहीं है, तो फिर उनके उत्पादों की पैकेजिंग और लेबलिंग में एनर्जी ड्रिंक शब्द का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है? अब इन सभी कंपनियों को अपने लेबल, मार्केटिंग रणनीतियों और अपने दावों के समर्थन में जवाब देना होगा। फिलहाल यह मामला उपभोक्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि लोग अक्सर इन्हीं दावों से प्रभावित होकर इन ड्रिंक्स का सेवन करते हैं। आने वाले समय में FSSAI की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या इन ड्रिंक्स की ब्रांडिंग और नाम में बड़ा बदलाव करना होगा या नहीं।
Comments
0 comment