चीन में पेट्रोल-डीजल का संकट गहराया! रिफाइनरी उत्‍पादन 4 साल के सबसे निचले स्‍तर पर, भारत की स्थिति कहीं बेहतर व्यापार एक महीने पहले 22
होर्मुज मार्ग तीन महीने से अधिक समय तक बंद रहने का असर अब चीन पर साफ दिख रहा है, जहां तेल रिफाइनिंग 4 साल और कच्‍चे तेल का आयात 8 साल के निचले स्‍तर पर पहुंच गया है। खपत और उत्‍पादन के अनुपात में भारत इस समय कहीं मजबूत नजर आ रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने के बाद होर्मुज मार्ग के दोबारा खुलने का रास्‍ता तो साफ हो गया है, लेकिन बीते तीन महीने से अधिक समय तक यह रास्‍ता बंद रहने का असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि कई देशों पर पड़ा है। पड़ोसी देश चीन ने भले ही अपनी रिफाइनरी क्षमता बढ़ाई और तेल का जमकर आयात भी किया हो, पर ईरान संकट के चलते अब उसके सामने भी मुश्किलें खड़ी होने लगी हैं। ताजा आंकड़े बताते हैं कि चीन की रिफाइनरियों का उत्‍पादन 4 साल में सबसे कम रहा है, जबकि इसके मुकाबले भारत कहीं संतुलित स्थिति में दिखता है।

आंकड़ों में सुस्‍त नजर आ रहा ड्रैगन

एक रिपोर्ट के अनुसार चीनी रिफाइनरियों की उत्‍पादन दर घटकर 4 साल के निचले स्‍तर पर आ चुकी है। इसकी मुख्‍य वजह आयात में कमी है, जो 8 साल में सबसे सुस्‍त रहा है। चीन की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि मई में वहां की रिफाइनरियों की औसत उत्‍पादन दर 66.3 फीसदी रही। इस दौरान कंपनियों की कुल प्रोसेसिंग भी सालाना आधार पर 9.1 फीसदी घटकर करीब 5.37 करोड़ टन रह गई।

चीन की सांख्यिकी एजेंसी के आंकड़े स्‍पष्‍ट करते हैं कि मई में कच्‍चे तेल का आयात साल 2018 के बाद सबसे कम रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान से क्रूड की आपूर्ति घटना है, क्‍योंकि ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन ही है। होर्मुज बंद रहने और ईरान के उत्‍पादन में गिरावट के कारण चीन को भी अपना आयात कम करना पड़ा। यही कारण रहा कि मई में चीन का कुल आयात 3.3 करोड़ बैरल रहा। इस अवधि में चीन का रोजाना आयात करीब 78 लाख बैरल रहा, जबकि पिछले साल यह औसत 1.16 करोड़ बैरल प्रतिदिन था।

निर्यात पर भी पड़ी मार

रिफाइनरियों की प्रोसेसिंग क्षमता घटने के चलते चीन का तेल निर्यात भी काफी कम रहा है। फिलहाल उसका पूरा ध्‍यान घरेलू जरूरतें पूरी करने पर है, जिसके चलते प्रोसेस किए गए पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर रोक लगा दी गई। चीन के पास कच्‍चे तेल का भंडार करीब 1 अरब बैरल के आसपास है, इसलिए उसकी घरेलू मांग तो पूरी होती रहेगी, लेकिन होर्मुज खुलने के बाद उसे आयात दोबारा बढ़ाना होगा, तभी रिफाइन किए गए तेल का निर्यात संभव हो पाएगा।

इसके मुकाबले कहां खड़ा है भारत

तेल रिफाइनिंग और आयात के कुल आंकड़ों में भारत भले ही चीन से कुछ कदम पीछे हो, लेकिन खपत और जरूरत के अनुपात में देखें तो भारत कहीं बेहतर स्थिति में नजर आता है। भारत ने मई में रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल का आयात किया, जिसमें सबसे बड़ी हिस्‍सेदारी रूस की रही। इसी दौरान भारतीय रिफाइनरियों का उत्‍पादन भी करीब 52.3 लाख बैरल रहा और पूरे महीने में यह आंकड़ा 2.14 करोड़ टन तक पहुंच गया।

यह संख्‍या भले ही चीन के 5.37 करोड़ बैरल से कम दिखती हो, लेकिन खपत और उत्‍पादन के लिहाज से बेहतर मानी जा रही है। दरअसल, चीन में पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन की सालाना खपत भारत के मुकाबले करीब 3 गुना है। वहां प्रतिदिन ईंधन की खपत करीब 1.5 करोड़ बैरल है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 45 से 50 लाख बैरल के आसपास रहता है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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