लालू प्रसाद यादव की सेहत में गिरावट, पटना के अस्पताल में जांच के बाद अब दिल्ली एम्स जाएंगे बिहार एक घंटा पहले 2
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते पटना के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उन्हें आगे के उपचार के लिए दिल्ली एम्स भेजा जा रहा है।

अचानक बिगड़ी सेहत

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की स्वास्थ्य स्थिति शुक्रवार को अचानक खराब हो गई। बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें पटना के इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। अस्पताल में करीब 2 घंटे तक रुकने और जरूरी जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद लालू यादव वापस अपने सरकारी आवास लौट गए। उनकी बेटी मीसा भारती ने जानकारी दी कि लालू यादव को शनिवार को दिल्ली के एम्स ले जाया जाएगा, क्योंकि उनके स्वास्थ्य का पुराना उपचार वहीं के विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा है।

कार्डियोलॉजी विभाग में जांच

मीसा भारती ने बताया कि उनके पिता के ब्लड प्रेशर में लगातार उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा था। इसी समस्या के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वहां उन्हें कार्डियोलॉजी विभाग ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी ईसीजी जांच की। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और सब कुछ सामान्य बताया जा रहा है, हालांकि उन्हें घर पर भी डॉक्टरी निगरानी में रहने की सलाह दी गई है। अस्पताल में लालू यादव के साथ उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी एवं उनके साले साधु यादव भी मौजूद थे।

सफाई व्यवस्था पर सवाल

इस दौरान मीसा भारती ने लालू यादव और राबड़ी देवी के घर के बाहर व्याप्त गंदगी को लेकर चिंता जताई और तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वहां के हालात बेहद खराब हैं और गंदगी का अंबार लगा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यह शिकायत घर खाली करने के मुद्दे से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह पटना की सामान्य स्थिति है। उन्होंने दावा किया कि आप पटना में किसी भी इलाके में जाएंगे तो आपको सफाई के ऐसे ही बदतर हालात देखने को मिलेंगे।

सुप्रीम कोर्ट से राहत

उधर, कानूनी मोर्चे पर 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव की जमानत को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका को खारिज कर दिया। यह मामला देवघर कोषागार से जुड़ा है, जिसमें उन पर 89 लाख रुपये के गबन का आरोप लगा था। सीबीआई की विशेष अदालत ने पहले उन्हें दोषी करार देते हुए साढ़े तीन साल की कैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया था। सीबीआई ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने इसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह लंबित अपीलों पर जल्द सुनवाई करे और यदि संभव हो तो छह महीने के भीतर इन पर अंतिम निर्णय सुनाए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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