उत्तर प्रदेश
2 महीने पहले
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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले से वन्यजीव प्रेमियों को परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। यहां के प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व और उसके आस-पास के वन क्षेत्रों में पिछले तीन महीनों के भीतर कई बाघों और बाघिनों की लगातार मौत हो चुकी है। इन घटनाओं ने देश के वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के आला अधिकारियों को गहरी चिंता में डाल दिया है। भारत के सबसे महत्वपूर्ण और सुरक्षित बाघ आवासों में शामिल दुधवा में इस तरह लगातार हो रही मौतें यहां की सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। शासन स्तर पर इसे अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है, जिसके बाद मामलों की जांच के लिए SIT का गठन किया गया है, जबकि NTCA ने भी इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
बाघिन की मौत के बाद SIT की जांच और IVRI की रिपोर्ट
दुधवा टाइगर रिजर्व में हाल ही में हुई एक बाघिन की मौत के बाद शासन पूरी तरह से हरकत में आ गया है। इस संवेदनशील मामले की गहनता से पड़ताल करने के लिए SIT का गठन किया गया है ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। दरअसल, इस बाघिन को 23 जून को रेस्क्यू अभियान के दौरान ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा गया था, लेकिन पकड़ने के कुछ ही समय बाद पिंजरे में उसकी मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद बरेली के IVRI में बाघिन का पोस्टमॉर्टम कराया गया। IVRI की शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि बाघिन के पेट और आंतों में गहरे जख्म थे और उसके पेट में कीड़े भी पाए गए थे। हालांकि, मौत की अंतिम और पुख्ता वजह अभी साफ नहीं हो पाई है, क्योंकि बिसरा जांच की विस्तृत रिपोर्ट आना अभी बाकी है। इस बीच, NTCA ने भी स्थानीय वन विभाग से इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट और विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
तीन महीनों में हुई बाघों की मौत का पूरा ब्यौरा
लखीमपुर खीरी के अलग-अलग वन प्रभागों और रेंजों में पिछले कुछ समय से बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले तीन महीनों के दौरान दर्ज की गई प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
- 1 अप्रैल: मैलानी रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर रेलवे ट्रैक के किनारे एक बाघिन का शव अत्यंत संदेहास्पद स्थिति में बरामद किया गया था। वन विभाग के अधिकारियों का कहना था कि जंगल के बीच से गुजरने वाली रेलवे लाइन पार करते समय किसी तेज रफ्तार ट्रेन की टक्कर लगने से इस बाघिन की मौत हुई थी।
- 5 मई: लखीमपुर खीरी के मझगई रेंज के नौनिया बीट में एक और बाघिन का शव मिला था। जांच में पाया गया कि इस करीब 5 वर्षीय बाघिन की मौत आपसी संघर्ष यानी दूसरे बाघ के साथ हुए हिंसक क्षेत्र अधिकार की लड़ाई के कारण हुई थी।
- 23 जून: इसी मझगई रेंज में वन्यजीव रेस्क्यू टीम ने एक बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर पिंजरे में कैद किया था। इस 4 वर्षीय बाघिन की पिंजरे के अंदर ही दम तोड़ने के कारण मौत हो गई, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। इसी घटना के बाद सरकार ने SIT जांच के आदेश दिए।
- 29 जून: दक्षिण खीरी वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले मोहम्मदी रेंज के महेशपुर जंगल से भी एक दुखद घटना सामने आई। सोमवार शाम को नियमित गश्त पर निकले वन कर्मियों की टीम को उदयपुर गांव के पास मुख्य सड़क पर एक घायल बाघ असहाय स्थिति में बैठा दिखाई दिया। इस बाघ के आगे के दोनों पैरों और कंधे पर बहुत गहरे और गंभीर जख्म थे। इलाज और सहायता पहुंचाने के प्रयासों के बीच ही इस घायल बाघ ने दम तोड़ दिया।
बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप और सुरक्षा पर उठते सवाल
वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का मानना है कि इस तरह कम अंतराल में लगातार हो रही बाघों की मौतें केवल सामान्य घटनाएं नहीं हैं। यह सीधे तौर पर बाघों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवासों के सिमटने और जंगलों के भीतर मानवीय गतिविधियों के बढ़ते दबाव की ओर इशारा करती हैं। जंगलों के बीच से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक और सड़कें इन बेजुबान जानवरों के लिए काल साबित हो रहे हैं, जबकि मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। जंगलों में इंसानी दखलंदाजी बढ़ने से वन्यजीवों का प्राकृतिक व्यवहार भी प्रभावित हो रहा है, जिससे वे आपसी संघर्ष या बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
अधिकारियों का पक्ष और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
इस पूरे घटनाक्रम और लगातार हो रही मौतों को लेकर मुख्य वन संरक्षक एवं दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजा मोहन ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के क्षेत्रों में पिछले तीन महीनों में बाघों की मौतें दर्ज की गई हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ मौतों की वजह आपसी संघर्ष और जंगल के बीच से गुजरने वाली रेलवे लाइन की चपेट में आना रही है। उन्होंने आगे कहा कि वन विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ इन मामलों की तह तक जाने की कोशिश कर रहा है। सभी मृत बाघों की विसरा और अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की सटीक और वैज्ञानिक वजहों का पूरी तरह से खुलासा हो सकेगा। फिलहाल वन विभाग जंगलों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने तथा गश्त बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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