उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों में अब सेब की महक फैलने लगी है। जिस फल की पैदावार को लंबे समय तक केवल जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे ठंडे पहाड़ी राज्यों तक सीमित माना जाता था, उसे अब लखीमपुर खीरी के किसान अपने खेतों में उगाकर एक नई राह दिखा रहे हैं। यहां के एक प्रगतिशील किसान धीरेंद्र मौर्य ने अपनी मेहनत के दम पर इस मुश्किल काम को संभव कर दिखाया है।
तराई में बागवानी की नई मिसाल
लखीमपुर खीरी जिले के किसान अब पारंपरिक फसलों की सीमा से बाहर निकलकर बागवानी की आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं। इसी सोच के साथ जिले के किसानों ने सेब की खेती की शुरुआत की है और अपनी आमदनी बढ़ाने का नया जरिया तलाश लिया है। ठंडे पहाड़ी इलाकों में होने वाला सेब अब यहां के 45 डिग्री वाले तापमान में भी अच्छी उपज दे रहा है।
पांच साल पहले शुरू हुआ छोटा ट्रायल
धीरेंद्र मौर्य बताते हैं कि उन्होंने करीब पांच साल पहले सेब की खेती का एक छोटा सा प्रयोग शुरू किया था। उस वक्त उन्होंने सेब के कुछ ही पौधे लगाए थे। जब यह प्रयोग पूरी तरह कामयाब रहा, तो उन्होंने करीब 2 बीघे खेत में सेब का एक बड़ा और शानदार बगीचा तैयार कर लिया।
गर्म इलाकों के लिए उपयुक्त तीन उन्नत किस्में
धीरेंद्र मौर्य ने अपने बाग में सेब की तीन बेहद उन्नत किस्में लगाई हैं। इनमें ‘हरमन-99’, ‘गोल्डन डोरसेट’ और ‘अन्ना डोरसेट’ शामिल हैं। ये ऐसी किस्में हैं जो उत्तर भारत के गर्म इलाकों में 40 से 45 डिग्री तक के भारी तापमान में भी बहुत अच्छी पैदावार देती हैं।
शुरुआत में किसी को नहीं था भरोसा
किसान के मुताबिक जब उन्होंने शुरुआत में सेब के पौधे लगाए थे, तब आसपास के लोगों को बिल्कुल यकीन नहीं था कि लखीमपुर खीरी जैसे गर्म जिले में सेब उग भी पाएगा। लेकिन आज पौधों की बेहतरीन ग्रोथ और उन पर लगे उम्दा क्वालिटी के फलों को देखकर हर कोई हैरान है। अब दूसरे किसान भी इस बाग को देखने पहुंच रहे हैं और सेब की खेती में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
धीरेंद्र मौर्य का मानना है कि अगर समय पर सिंचाई की जाए, पौधों की सही देखभाल हो और उन्हें बीमारियों से बचाया जाए, तो सेब की खेती किसानों की कमाई का एक मजबूत और बड़ा साधन बन सकती है।
हरमन-99 सबसे बेहतर, जुलाई में पकते हैं फल
इस खेती की सबसे खास बात यह है कि इन किस्मों को उगाने के लिए किसी विशेष मिट्टी की जरूरत नहीं पड़ती। ये पारंपरिक पहाड़ी सेब से बिल्कुल अलग हैं, इसी वजह से गर्म जलवायु को भी आसानी से सह लेती हैं। धीरेंद्र मौर्य के अनुसार, इतनी गर्मी के बावजूद उनके बाग के सेब का वजन 300 ग्राम तक पहुंच जाता है।
उन्होंने बताया कि इन सभी किस्मों में ‘हरमन-99’ सबसे बेहतर है, जिसके फल जुलाई के महीने में पूरी तरह पककर तैयार हो जाते हैं। इस अनोखे और कामयाब प्रयोग को देखने के लिए अब दूर-दूर से किसान उनके बगीचे में पहुंच रहे हैं।
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