कुल्लू के डीसी और एसपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, एफआईआर के आदेश पर रोक लेकिन ट्रांसफर पर सख्ती बरकरार हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 3
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में रेव पार्टी मामले को लेकर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एफआईआर के आदेशों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, हालांकि अधिकारियों के तबादले का निर्देश अभी भी कायम है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में चर्चा में रही रेव पार्टी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कुल्लू के डीसी और एसपी को बड़ी राहत दी है। सर्वोच्च अदालत ने कुल्लू के डीसी और एसपी के खिलाफ मामला दर्ज करने के हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगा दी है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की खंडपीठ द्वारा की गई। कोर्ट के इस निर्णय से उन अधिकारियों ने फिलहाल राहत की सांस ली है, जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।

तबादले की कार्रवाई पर मुहर

हालांकि एफआईआर से राहत मिलने के बावजूद, इन अधिकारियों के लिए मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उन निर्देशों को बरकरार रखा है, जिसमें डीसी और एसपी का तबादला करने के लिए कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दोनों अधिकारियों के तबादले से संबंधित हाईकोर्ट के आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए जाएं। इसका अर्थ यह है कि राज्य सरकार को अब इन दोनों अफसरों को उनके वर्तमान पद से हटाना ही होगा।

क्या है पूरा विवाद

यह पूरा मामला 7 से 11 जून के बीच कुल्लू के कसोल में आयोजित की गई एक कथित रेव पार्टी से जुड़ा है। आरोप है कि इस पार्टी के आयोजन के लिए एसडीएम द्वारा साउंड सिस्टम लगाने की अनुमति दी गई थी। इस आयोजन के बाद एक जनहित याचिका दायर की गई, जिस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के सचिव को मौके पर स्थिति की जांच के लिए भेजा था। सचिव की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कुल्लू के डीसी, एसपी और एसडीएम का एक सप्ताह के भीतर तबादला करने के निर्देश दिए थे। उस समय हाईकोर्ट की खंडपीठ में मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी शामिल थे।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

जनहित याचिका में यह दावा किया गया था कि इस रेव पार्टी में हजारों की संख्या में पर्यटक शामिल हुए थे। चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि 5 जून को ही मणिकर्ण थाना प्रभारी और डीएसपी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी जारी की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि इस सुनसान जंगली इलाके में 3,000 से 3,500 लोगों के जुटने की संभावना है, जहां नशीले पदार्थों की तस्करी और सेवन का खतरा बहुत अधिक है। इन चेतावनियों के बावजूद पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी लापरवाही को आधार बनाकर हाईकोर्ट ने तत्कालीन एफआईआर के आदेश दिए थे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होनी तय हुई है। तब तक सभी संबंधित पक्षों को अपनी तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल प्रदेश भर में इस मामले और अदालती आदेश की चर्चा जोरों पर है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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