छत्तीसगढ़
एक महीने पहले
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विचारों
किसानों के लिए बड़ी राहत और प्रोत्साहन
खरीफ सीजन के दौरान राज्य सरकार किसानों को एक बड़ी सौगात दे रही है। सरकार की कृषक उन्नति योजना का मुख्य उद्देश्य अब धान की पारंपरिक खेती से हटकर वैकल्पिक फसलों की ओर किसानों को प्रेरित करना है। यदि किसान इस सीजन में धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, सोयाबीन, कपास या कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों का चयन करते हैं, तो उन्हें सरकार द्वारा 15,000 रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस कदम का लक्ष्य न केवल किसानों की आमदनी को बढ़ाना है, बल्कि मिट्टी की सेहत में सुधार करना और खेती की लागत को भी कम करना है।
फसल विविधीकरण क्यों है जरूरी
बालोद जिले के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी केशव राम पिद्दा ने इस योजना के महत्व को समझाते हुए बताया कि कई ऐसे इलाके हैं जहां धान की फसल पर्याप्त उत्पादन नहीं दे पाती, जिससे किसानों को अक्सर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी जगहों पर फसल विविधीकरण यानी धान की जगह दूसरी नकदी फसलें उगाना अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है। अरहर, उड़द, मूंग और सोयाबीन जैसी फसलें न केवल कम पानी में बेहतर पैदावार देती हैं, बल्कि बाजार में भी इनकी अच्छी मांग बनी रहती है।
आवेदन की झंझट से मुक्ति
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें शामिल होने के लिए किसानों को किसी भी सरकारी कार्यालय में जाकर आवेदन जमा करने की आवश्यकता नहीं है। कृषि विभाग खुद इस पूरी प्रक्रिया को सरल बना रहा है। विभाग के अधिकारी गिरदावरी प्रक्रिया के दौरान स्वयं खेतों का दौरा करेंगे और वहां बोई गई फसलों का भौतिक सत्यापन करेंगे। इसी सत्यापन प्रक्रिया के बाद पात्र किसानों के खाते में प्रोत्साहन राशि सीधे भेज दी जाएगी।
डिजिटल सर्वे और भौतिक सत्यापन
अधिकारियों के अनुसार, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फसलों के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए दो तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। जहां कुछ क्षेत्रों में आधुनिक डिजिटल सर्वे के माध्यम से फसलों का डेटा तैयार किया जा रहा है, वहीं अन्य स्थानों पर विभाग मैन्युअल तरीके से सत्यापन कर रहा है। दोनों ही स्थितियों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खेत में वास्तविक तौर पर कौन सी फसल बोई गई है, इसकी पुष्टि होने पर ही किसान इस लाभ के हकदार माने जाएंगे।
पहले से फसल बदलने वाले किसानों को भी फायदा
केशव राम पिद्दा ने स्पष्ट किया कि जो किसान पहले से ही इस दिशा में कदम उठा चुके हैं, उन्हें भी योजना का पूरा लाभ दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, बालोद जिले के जिन किसानों ने पहले ही अपने करीब 5 एकड़ धान के खेतों में मक्के की बुवाई कर ली है, वे भी इस योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। ऐसे किसानों को भी नियमानुसार आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
गाँव-गाँव जाकर किया जा रहा जागरूक
विभाग की ओर से राज्य के हर कोने में प्रचार-प्रसार अभियान तेज कर दिया गया है। कृषि विभाग के कर्मचारी और अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को फसल विविधीकरण के फायदों के बारे में समझा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें और किसी भी तरह के आर्थिक नुकसान से बच सकें। सरकार का यह प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें कृषि के आधुनिक तौर-तरीकों से जोड़ने की एक ठोस पहल है।
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