कोटा का अनूठा गर्ल्स हॉस्टल: जहां वार्डन नहीं ओनर खुद पूछती हैं हाल, रूफटॉप कैफे में मिलती है गरमा-गरम मैगी राजस्थान 2 महीने पहले 64
कोटा के लैंडमार्क सिटी में स्थित मधुराम हॉस्टल ने अपनी होमली वाइब्स और आधुनिक सुविधाओं के जरिए पारंपरिक हॉस्टल संस्कृति की परिभाषा बदल दी है। यहां की छात्राएं पढ़ाई के तनाव से दूर घर जैसा माहौल और देर रात तक उपलब्ध कैफे सुविधा का आनंद ले रही हैं।

कोटा के हॉस्टल कल्चर में बड़ा बदलाव

शिक्षा की नगरी कोटा में पढ़ाई का दबाव और हॉस्टल की सख्त दिनचर्या के बीच, लैंडमार्क सिटी इलाके में स्थित 'मधुराम हॉस्टल' एक नई मिसाल कायम कर रहा है। अमूमन कोटा में छात्र-छात्राओं की दिनचर्या किताबों के पन्नों और कठिन कॉम्पिटिशन की तैयारी के साथ गुजरती है, लेकिन इस हॉस्टल ने उस रूढ़िवादी ढांचे को तोड़ दिया है। यहाँ न केवल रहने की आधुनिक व्यवस्था है, बल्कि छात्राओं को घर जैसा सुकून भी मिलता है। हाई-स्पीड इंटरनेट, ओपन जिम और रूफटॉप कैफे जैसी सुविधाएं इसे बाकी जगहों से अलग बनाती हैं। यह कोटा का इकलौता ऐसा हॉस्टल होने का दावा करता है, जहां छात्राओं को पढ़ाई के बेहतरीन माहौल के साथ-साथ हर प्रकार की केयर और लग्जरी मिल रही है, ताकि उन्हें अपने घर की याद न आए।

व्यवसाय नहीं, छात्राओं के साथ आत्मीय जुड़ाव

जब हमारी टीम ने इस हॉस्टल के भीतर प्रवेश किया, तो वहां का वातावरण बेहद सकारात्मक लगा। दीवारों पर लगे प्रेरक और मोटिवेशनल पोस्टर छात्राओं के मनोबल को बढ़ाने का काम करते हैं। हॉस्टल की ओनर कविता राठी का मानना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ कमरा उपलब्ध कराना नहीं है। वे कहती हैं कि उनका मुख्य उद्देश्य छात्राओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। जैसे ही छात्राएं हॉस्टल में आती हैं, उन्हें यह याद दिलाया जाता है कि वे यहाँ किस बड़े सपने को पूरा करने के लिए अपने माता-पिता से दूर आई हैं।

हालांकि, हॉस्टल की रोजमर्रा की देखरेख के लिए स्टाफ और वार्डन नियुक्त किए गए हैं, लेकिन कविता राठी खुद इस जिम्मेदारी को निभाना पसंद करती हैं। उन्हें लगता है कि इतनी दूर से आई बच्चियों को केवल कर्मचारियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। वे नियमित रूप से हॉस्टल पहुंचती हैं, छात्राओं के साथ समय बिताती हैं और उनकी पढ़ाई तथा व्यक्तिगत समस्याओं पर फीडबैक लेती हैं। उनका कहना है कि कोटा में हॉस्टल्स की भरमार है, लेकिन हमने कुछ हटकर करने का सोचा था। बच्चियों को अकेलापन न खले, इसलिए वे खुद व्यक्तिगत तौर पर उनसे जुड़ती हैं ताकि छात्राओं को पूरी तरह से घर जैसा अनुभव हो सके।

रूफटॉप कैफे और देर रात की भूख का समाधान

कोटा के अधिकांश हॉस्टल्स में खाने के सख्त समय निर्धारित होते हैं। यदि छात्र देर रात तक पढ़ाई करने के कारण खाना खाने के निश्चित समय पर नहीं पहुंच पाते, तो अक्सर उन्हें भूखे ही सोना पड़ता है। लेकिन मधुराम हॉस्टल में यह समस्या पूरी तरह खत्म हो गई है। यहाँ की छात्रा प्राची ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि देर रात जागकर पढ़ाई करते समय भूख लगना सामान्य है। ऐसे में हॉस्टल से बाहर जाने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि छत पर ही एक शानदार रूफटॉप कैफे मौजूद है।

प्राची के अनुसार, उन्हें देर रात पढ़ाई के दौरान जो कुछ भी चाहिए होता है, वह ताजा और गरम बनकर मिल जाता है। गरम मैगी, ताजे जूस और शेक्स उनकी पहली पसंद हैं। यहाँ खाने के समय का कोई दबाव नहीं है, जो उन्हें इस बात का एहसास कराता है कि वे अपने घर में हैं। यह आजादी और सुविधा उन्हें पढ़ाई के भारी दबाव से निपटने में बहुत मदद करती है।

मानसिक स्वास्थ्य और मोटिवेशन पर जोर

पढ़ाई के बढ़ते तनाव को देखते हुए यह हॉस्टल एक सुरक्षित आश्रय की तरह काम कर रहा है। यहाँ की व्यवस्था इस तरह से तैयार की गई है कि छात्राओं को न केवल शारीरिक सुविधाएं मिलें, बल्कि उनका मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहे। कविता राठी का प्रयास है कि लड़कियां तनावमुक्त रहें। उनका यह नवाचार न केवल अभिभावकों के लिए राहत की बात है, बल्कि कोटा जैसे चुनौतीपूर्ण शिक्षा केंद्र में छात्राओं के लिए एक नया रास्ता दिखा रहा है। यह सिद्ध करता है कि यदि सही माहौल और सकारात्मक सपोर्ट मिले, तो बच्चों की कठिन राहें भी आसान हो सकती हैं। आज के समय में जब कोटा में कॉम्पिटिशन का दबाव सिर चढ़कर बोलता है, वहां मधुराम हॉस्टल का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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