चांदमारी बालाजी मंदिर कोटा: सेना की फायरिंग रेंज से जुड़ा है नाम, स्वयंभू मूर्ति के दर्शन के लिए जुटते हैं श्रद्धालु राजस्थान एक महीने पहले 20
कोटा में चंबल नदी के किनारे बसा चांदमारी बालाजी मंदिर भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है, जहां स्वयंभू मूर्ति के दर्शन के लिए रोज सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सेना की पुरानी फायरिंग रेंज के कारण इस मंदिर को यह नाम मिला।

कोटा में चंबल नदी के तट पर स्थित चांदमारी बालाजी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का एक प्रमुख स्थल बन चुका है। यहां तक पहुंचने का रास्ता कठिन और ऊबड़-खाबड़ है, फिर भी हर दिन सैकड़ों भक्त दर्शन के लिए यहां खिंचे चले आते हैं।

स्वयंभू मानी जाती है मंदिर की मूर्ति

मंदिर के पुजारी श्याम लाल शर्मा बताते हैं कि यहां विराजमान बालाजी की मूर्ति स्वयंभू है। यही मान्यता भक्तों की श्रद्धा को और गहरा करती है और दूर-दूर से लोग यहां शीश नवाने पहुंचते हैं।

फायरिंग रेंज से पड़ा अनोखा नाम

इस स्थान पर पहले सेना की फायरिंग रेंज हुआ करती थी, और इसी कारण मंदिर का नाम 'चांदमारी बालाजी' पड़ गया। यह नाम आज भी इस क्षेत्र के सैन्य इतिहास की याद दिलाता है।

सुरक्षा कारणों से बंद हुए सीधे रास्ते

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेना ने 1970 और 2000 में मंदिर तक जाने वाले सीधे रास्तों को बंद कर दिया था। इसका असर यह हुआ कि अब भक्तों को मंदिर तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है।

मरम्मत के इंतजार में जर्जर मंदिर

प्रशासनिक पाबंदियों के चलते जर्जर हो चुके इस मंदिर की मरम्मत भी नहीं हो पा रही है। तमाम कठिनाइयों के बावजूद भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है और उनका विश्वास आज भी अटूट बना हुआ है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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