पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता पर सियासी घमासान, विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल पश्चिम बंगाल 2 महीने पहले 79
पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की विफलताओं को छिपाने और जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति बताया है।

समान नागरिक संहिता पर तीखी बहस

पश्चिम बंगाल की राजनीति में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी एक बार फिर बड़े विवाद का मुद्दा बन गया है। राज्य में इसे लागू करने की चर्चा के बीच विपक्षी दलों ने सत्ताधारी खेमे की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का स्पष्ट आरोप है कि समान नागरिक संहिता का मुद्दा उठाकर सरकार असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। सुवेंदु अधिकारी द्वारा राज्य में यूसीसी लागू करने के बयान के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

विपक्ष की घेराबंदी और सवाल

शिवसेना (यूबीटी), तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के नेताओं ने सोमवार को एक सुर में सरकार की नीतियों की आलोचना की। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने आईएएनएस से चर्चा के दौरान कहा कि विपक्ष देश से जुड़े हर महत्वपूर्ण विषय पर संवाद करने के लिए हमेशा तैयार रहता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सकारात्मक चर्चा का समर्थक है, लेकिन अगर सरकार के कामकाज में खामियां हैं और नीतियां गलत हैं, तो उनका विरोध करना विपक्ष का लोकतांत्रिक कर्तव्य है।

आनंद दुबे ने आगे कहा कि यदि सरकार कोई विधेयक लाती है, तो उस पर चर्चा की जानी चाहिए, लेकिन सरकार का यह रवैया कि वह अपनी नाकामियों को ढकने के लिए बड़े मुद्दों का सहारा लेती है, पूरी तरह गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष देश के साथ खड़ा है, लेकिन सरकार की बेईमानी के खिलाफ भी अडिग रहेगा।

विविधता और संविधान पर डोला सेन का रुख

तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन ने समान नागरिक संहिता पर बात करते हुए भारत की विशाल विविधता और संविधान के मूल ढांचे का जिक्र किया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि किसी भी सुधार की शुरुआत स्वयं के संगठन या घर से होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जो लोग यूसीसी की बात कर रहे हैं, क्या वे अपनी पार्टी और अपने संगठनों के भीतर जाति, धर्म और लिंग के आधार पर वास्तविक समानता का पालन कर रहे हैं?

डोला सेन ने रवींद्रनाथ टैगोर की मान्यताओं को याद करते हुए कहा कि भारत की असली ताकत उसकी अलग-अलग परंपराएं, भाषाएं और विचार हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऊपर से थोपी गई कोई भी एक व्यवस्था देश की विविधता को नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि भारत राज्यों का एक ऐसा संघ है जो सभी समुदायों और क्षेत्रों को साथ लेकर चलता है। उनके अनुसार, यूसीसी लागू करने की जिद देश की धर्मनिरपेक्षता, संप्रभुता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।

कांग्रेस का सरकार पर निशाना

राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने भी इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार की मंशा पर प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा विवाद सिर्फ सुर्खियां बटोरने और जनता के वास्तविक सरोकारों से ध्यान हटाने का एक माध्यम है। खेड़ा के अनुसार, सरकार बेरोजगारी, महंगाई और विकास जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा करने से बचने के लिए ऐसे विवादास्पद मुद्दों को हवा देती है। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में यूसीसी को लेकर छिड़ा यह राजनीतिक संग्राम आने वाले दिनों में और अधिक उग्र होने के आसार हैं, जहां पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने तर्कों के साथ आमने-सामने हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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