पश्चिम बंगाल
एक घंटा पहले
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विचारों
उपचुनावों से दूरी ने बढ़ाई चर्चा
पश्चिम बंगाल की सियासत में 15 साल के लंबे शासन के बाद तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने अगले महीने होने वाले विधानसभा उपचुनावों में भाग न लेने का निर्णय लिया है। ममता बनर्जी के इस अप्रत्याशित कदम ने राज्य के राजनीतिक जानकारों के बीच कई तरह की अटकलें शुरू कर दी हैं। हालांकि उनके करीबी लोग लगातार उन पर मैदान में उतरने का दबाव बना रहे थे, लेकिन उन्होंने चुनावी प्रक्रिया से खुद को दूर रखना ही उचित समझा है।
संगठन और इंडिया गठबंधन पर फोकस
71 वर्षीय ममता बनर्जी का यह फैसला उनकी बदली हुई प्राथमिकताओं को दर्शाता है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत और सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से बंगाल की राजनीति पूरी तरह बदल गई है। वर्तमान में ममता बनर्जी का मुख्य ध्यान दो मोर्चों पर है। पहला, तृणमूल कांग्रेस के संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा करना और दूसरा, विपक्षी इंडिया ब्लॉक को एक मजबूत मंच प्रदान करने के लिए एकजुट करना।
बदलते सियासी समीकरण
सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से राज्य में राजनीतिक परिदृश्य काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। माना जा रहा है कि चुनावी राजनीति से पीछे हटकर ममता अब एक बड़ी राष्ट्रीय भूमिका की तैयारी में हैं। वह अपनी शेष ऊर्जा को वामपंथी दलों और कांग्रेस के साथ एक नई राजनीतिक गोलबंदी तैयार करने में लगा रही हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उनकी यह नई रणनीति तृणमूल कांग्रेस को बंगाल की सत्ता में वापसी कराने में मददगार साबित होती है या नहीं।
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