जम्मू-कश्मीर
एक घंटा पहले
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किश्तवाड़ में विरोध का माहौल
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में एक 15 साल की आदिवासी नाबालिग लड़की के साथ कथित बलात्कार और उसके बाद हुई संदिग्ध मौत के मामले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सनातन धर्म सभा और मजलिस-ए-शूरा ने संयुक्त रूप से गुरुवार को बंद का आह्वान किया, जिसके चलते पूरे किश्तवाड़ जिले में जनजीवन प्रभावित रहा।
बंद का असर और सुरक्षा व्यवस्था
बंद के आह्वान के कारण किश्तवाड़ में दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह से बंद रहे। सड़क पर पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का संचालन भी बाधित हुआ। किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन को भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात करना पड़ा। विशेष रूप से किश्तवाड़ और चतरू कस्बों के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है ताकि शांति व्यवस्था बरकरार रहे।
क्या है पूरा मामला
पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, मृतका एक स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा थी। आरोप है कि उसी स्कूल में कार्यरत एक सरकारी शिक्षक ने पिछले कई महीनों से लगातार उसका यौन शोषण किया। इस दुराचार के कारण नाबालिग गर्भवती हो गई थी। घटनाक्रम तब और अधिक दुखद हो गया जब चतरू में कथित रूप से गर्भपात कराने की कोशिश की गई, जिसके परिणामस्वरूप नाबालिग लड़की की मौत हो गई।
गिरफ्तारियां और कानूनी कार्रवाई
इस सनसनीखेज मामले में किश्तवाड़ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीती 20 अगस्त को मुख्य आरोपी सरकारी शिक्षक खालिद अहमद शेख और उसके भाई को गिरफ्तार कर लिया था। खालिद अहमद शेख इंदरवाल के बुमलपोरा में स्थित एक मिडिल स्कूल में ग्रेड-2 टीचर के पद पर तैनात था और वहां प्रभारी प्रधानाध्यापक की भूमिका निभा रहा था। पुलिस अब तक इस मामले में कुल 5 आरोपियों को हिरासत में ले चुकी है।
एसआईटी का गठन और सख्त धाराओं में केस
पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए किश्तवाड़ पुलिस ने इस केस को बेहद गंभीरता से लिया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ ही यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इस पूरे मामले की गहन, वैज्ञानिक और समयबद्ध तरीके से जांच सुनिश्चित करने के लिए किश्तवाड़ के एएसपी प्रदीप सिंह के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है।
प्रशासन की प्रतिबद्धता
स्थानीय लोग लगातार इंसाफ की मांग कर रहे हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाने की अपील कर रहे हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले बडगाम में भी एक 12 साल की बच्ची के साथ रेप और मर्डर के मामले में पुलिस ने 36 घंटे के भीतर गिरफ्तारी कर ली थी और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने का संकल्प दोहराया था।
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