मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के लिए एक बड़ी सौगात सामने आई है। आने वाले समय में यह जिला एक प्रमुख इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में आकार लेने जा रहा है। नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में बैतूल से जुलवानिया तक प्रस्तावित नेशनल हाईवे-347बी को हरी झंडी मिल गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत करीब 4415.60 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है।
यह राष्ट्रीय राजमार्ग बैतूल के हैवारखेड़ी से शुरू होकर बड़वानी जिले के जुलवानिया तक पहुंचेगा। इसकी कुल लंबाई 233.653 किलोमीटर होगी। शुरुआत में इसे पांच चरणों में बनाने की योजना थी, लेकिन अब इसे दो बड़े पैकेज में पूरा किया जाएगा, ताकि निर्माण कार्य में तेजी आ सके।
दो पैकेज में होगा निर्माण
पहले पैकेज के तहत हैवारखेड़ी से रोशनी, आशापुर और रूधि होते हुए करीब 125.01 किलोमीटर लंबी टू-लेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। इसमें पक्की पटरी (पेव्ड शोल्डर) के साथ 70.39 किलोमीटर का बायपास भी शामिल रहेगा।
दूसरे पैकेज में देशगांव से जुलवानिया तक के 108.643 किलोमीटर मार्ग को फोर-लेन में अपग्रेड किया जाएगा। इसमें 54.273 किलोमीटर का बायपास और 16.20 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड सेक्शन भी सम्मिलित है। पूरी परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युइटी मोड पर होगा, जिसमें सरकारी और निजी दोनों तरह का निवेश शामिल रहेगा।
महाराष्ट्र और गुजरात से सीधा जुड़ाव
इस हाईवे के तैयार होने पर खंडवा का सीधा संपर्क महाराष्ट्र और गुजरात से स्थापित हो जाएगा। यह मार्ग आगे चलकर नागपुर और बड़ोदरा जैसे बड़े शहरों तक पहुंच को भी आसान बनाएगा, जिससे व्यापार, परिवहन और निवेश के नए अवसर सामने आएंगे।
खास बात यह है कि इस कॉरिडोर से कई आर्थिक और औद्योगिक केंद्र सीधे जुड़ेंगे। इनमें टेक्सटाइल क्लस्टर, मेगा फूड पार्क, औद्योगिक पार्क और सुपर थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी रफ्तार
यह कॉरिडोर सामाजिक दृष्टि से भी अहम साबित होगा। इससे खंडवा, बड़वानी, बैतूल और खरगोन जैसे जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। खासकर आदिवासी इलाकों में रोजगार और विकास के नए द्वार खुलेंगे।
इसके अलावा इस हाईवे के माध्यम से रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क जैसे बड़े बुनियादी ढांचे आपस में जुड़ेंगे। इससे पूरे क्षेत्र में कनेक्टिविटी और कारोबारी गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
4415 करोड़ रुपए की यह परियोजना निमाड़ क्षेत्र के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल खंडवा की पहचान एक मजबूत इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में बनेगी, बल्कि किसानों, व्यापारियों और आम लोगों के लिए भी प्रगति के नए रास्ते खुलेंगे।
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