कांकेर: नाबालिग की डिलीवरी मामले में अस्पताल की बड़ी लापरवाही, नवजात की मौत के बाद खुला राज छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 4
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक नाबालिग लड़की की डिलीवरी बिना पुलिस को सूचित किए सरकारी अस्पताल में करवाई गई। बाद में नवजात की मौत होने पर पूरा मामला सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

मामले का खुलासा

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक अत्यंत गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 15 साल की नाबालिग किशोरी की डिलीवरी सरकारी अस्पताल में चोरी-छिपे करा दी गई। जब नवजात शिशु की मौत हुई, तब इस मामले ने तूल पकड़ा और नाबालिग से रेप की घटना का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने इस मामले में आरोपी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है और मामले की व्यापक जांच की जा रही है।

क्या है पूरा घटनाक्रम

यह मामला भानुप्रतापपुर विकासखंड के हाटकर्रा गांव का है। दिनांक 29 जुलाई को एक गर्भवती नाबालिग लड़की को उसके परिवार के सदस्य ही शासकीय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल के प्रभारी आरएमओ देवकुमार साहू ने लड़की की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल प्रभाव से भर्ती कर लिया। अस्पताल में उसने एक बच्चे को जन्म दिया। नियमानुसार, किसी भी नाबालिग के प्रसव के मामले में पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होता है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखते हुए इस पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा।

जच्चा और बच्चा तीन दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी गई। अस्पताल प्रबंधन ने तीन दिन के इलाज के बाद दोनों को छुट्टी दे दी और वे अपने घर लौट गए।

नवजात की मौत के बाद सामने आई सच्चाई

घर पहुंचने के कुछ समय बाद ही नवजात शिशु की तबीयत बिगड़ने लगी। आनन-फानन में परिजनों ने संजीवनी 108 एम्बुलेंस को कॉल किया और बच्चे को धनेलीकन्हार अस्पताल ले गए। वहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रबंधन ने नवजात की मौत की सूचना तुरंत पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और पूरे मामले की तहकीकात शुरू की। गहन जांच-पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि पीड़ित लड़की नाबालिग है और उसके साथ रेप किया गया था। पुलिस ने इस मामले में संजय सलाम नामक आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

आरएमओ ने दी अपनी सफाई

इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। जब पुलिस ने आरएमओ देवकुमार साहू से इस बारे में जवाब मांगा कि पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया गया, तो उन्होंने बचाव करते हुए दावा किया कि लड़की के परिजनों ने आधार कार्ड में जन्मतिथि गलत होने की बात कही थी। उन्होंने दावा किया कि परिजनों ने लड़की को बालिग बताया था। आरएमओ ने तर्क दिया कि लड़की और लड़के, दोनों पक्षों के परिवार अस्पताल में साथ आए थे और उन्होंने इसे पंचायत स्तर का आपसी मामला मानकर पुलिस को सूचित करना जरूरी नहीं समझा।

पहले भी अस्पताल में सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह कोई पहली बार नहीं है जब हाटकर्रा अस्पताल में इस तरह का मामला चर्चा में रहा हो। लगभग दो महीने पहले भी इसी अस्पताल में 19 साल की एक अविवाहित गर्भवती लड़की प्रसव के लिए पहुंची थी। उस समय भी दोनों पक्षों के लोग अस्पताल में मौजूद थे। उस मामले में लड़की ने आदिवासी परंपरा के तहत पैठू गई थी और दोनों पक्ष इसमें सहमत थे। उस वक्त अस्पताल प्रबंधन ने लड़की के अविवाहित होने और मामले की गंभीरता को समझते हुए कोरर पुलिस को सूचना दी थी। उस दौरान पुलिस को जानकारी दिए जाने को लेकर गांव में काफी विवाद हुआ था और परिजनों तथा अस्पताल के स्टाफ के बीच तीखी बहस भी हुई थी। इस बार की लापरवाही ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप