जोधपुर: शेफ ने तरबूज पर उकेरी नाना पाटेकर की अद्भुत आकृति, 6 घंटे की कड़ी मेहनत से दी श्रद्धांजलि राजस्थान 6 घंटे पहले 5
राजस्थान के जोधपुर में एक शेफ ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए तरबूज पर दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर का चेहरा बेहद बारीकी से उकेरा है। इस अनूठी श्रद्धांजलि को तैयार करने में शेफ को 6 घंटे का समय लगा।

अभिनेता के प्रति अनूठा सम्मान

राजस्थान के जोधपुर शहर से एक बेहद भावुक और रचनात्मक खबर सामने आई है। यहाँ के एक पांच सितारा होटल 'द उम्मेद' में काम करने वाले शेफ हर्षवर्धन सिंह ने दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर को याद करने के लिए एक बहुत ही अनोखा तरीका अपनाया है। शेफ ने अपनी पाक कला के हुनर का प्रदर्शन करते हुए एक तरबूज को कैनवास बना दिया और उस पर बड़ी ही बारीकी से नाना पाटेकर का चेहरा उकेर दिया। यह कलाकृति न केवल उनके हुनर को दर्शाती है, बल्कि उस महान अभिनेता के प्रति उनके गहरे सम्मान और लगाव को भी प्रदर्शित करती है। इस पूरी कलाकृति को आकार देने में शेफ हर्षवर्धन सिंह को लगभग 5 से 6 घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

बचपन से ही रहे हैं प्रशंसक

शेफ हर्षवर्धन सिंह का कहना है कि वे बचपन से ही नाना पाटेकर की अदाकारी के कायल रहे हैं। नाना पाटेकर की प्रभावशाली संवाद अदायगी, किसी भी किरदार में पूरी तरह से ढल जाने की क्षमता और उनके अभिनय की गहराई ने हमेशा ही शेफ के मन पर अमिट छाप छोड़ी है। चाहे गंभीर भूमिकाएं हों या फिर कॉमेडी, नाना पाटेकर ने हर शैली में खुद को साबित किया है। हर्षवर्धन के लिए नाना पाटेकर केवल एक फिल्म अभिनेता नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे प्रेरणास्रोत हैं जिन्होंने अपने काम से दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। उनके निधन के बाद हर्षवर्धन ने महसूस किया कि उन्हें अपनी कला के माध्यम से अपने प्रिय कलाकार को श्रद्धांजलि देनी चाहिए।

फलों पर नक्काशी का कठिन हुनर

फलों और सब्जियों पर नक्काशी करना पाक कला (कुलीनरी आर्ट) का एक बेहद कठिन और धैर्य वाला काम माना जाता है। इसमें केवल हाथों की सफाई ही काफी नहीं होती, बल्कि बहुत अधिक एकाग्रता और बारीकियों को समझने की समझ भी आवश्यक होती है। तरबूज जैसे फल की कठोर सतह पर किसी व्यक्ति के चेहरे के हाव-भाव और उनकी पहचान को हूबहू उभारना एक बड़ी चुनौती होती है। हर्षवर्धन सिंह ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 6 घंटे तक लगातार मेहनत करके इस चेहरे को तरबूज पर जीवंत किया। उन्होंने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि चेहरे के हर हिस्से में नाना पाटेकर की पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई दे, ताकि देखने वाला व्यक्ति तुरंत उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सके।

एक सदी में एक बार आते हैं ऐसे कलाकार

हर्षवर्धन सिंह के अनुसार, नाना पाटेकर जैसे कलाकार सदियों में कभी एक बार ही जन्म लेते हैं। सिनेमा जगत में उनके योगदान और उनके बेमिसाल अभिनय को आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी। शेफ का मानना है कि शब्दों से श्रद्धांजलि देने के अलावा अपनी कला के माध्यम से उन्हें याद करना उनके लिए सबसे संतोषजनक अनुभव रहा है। तरबूज पर बनाई गई यह विशेष नक्काशी अब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। हर्षवर्धन का यह छोटा सा प्रयास बताता है कि कलाकार के प्रति प्रेम को व्यक्त करने के लिए किसी बड़े आयोजन की नहीं, बल्कि सच्ची भावनाओं और हुनर की आवश्यकता होती है। यह कलाकृति उनकी ओर से अपने पसंदीदा अभिनेता के लिए एक भावपूर्ण और सच्ची श्रद्धांजलि है, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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