नवरात्रि का चौथा दिन: मां कूष्मांडा को अर्पित करें ये खास भोग, घर में बढ़ेगी सुख-शांति धर्म एक घंटा पहले 6
नवरात्रि के चौथे दिन देवी कूष्मांडा की पूजा का विधान है। इस दिन माता को विशेष भोग लगाकर उनकी कृपा प्राप्त की जा सकती है।

देवी कूष्मांडा की महिमा और स्वरूप

नवरात्रि के पावन पर्व के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की उपासना की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब माता ने अपनी मंद मुस्कान से इस ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें कूष्मांडा कहा जाता है। संस्कृत में कुम्हड़े को कूष्मांडा कहते हैं, और माता को कुम्हड़े की बलि अत्यंत प्रिय है। मां कूष्मांडा सिंह पर सवार हैं और अष्टभुजाओं से सुशोभित हैं। उनके सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत से पूर्ण कलश, चक्र और गदा है। उनके आठवें हाथ में एक जप की माला है, जिसमें समस्त सिद्धियों और निधियों का वास माना गया है।

माता कूष्मांडा बहुत दयालु हैं और भक्तों की थोड़ी सी भक्ति से ही प्रसन्न हो जाती हैं। जो भी साधक सच्चे मन और श्रद्धा के साथ उनकी शरण में जाता है, उसे जीवन में परम पद की प्राप्ति होती है। मां कूष्मांडा का निवास स्थान सूर्य मंडल के केंद्र में माना जाता है। कहा जाता है कि केवल उन्हीं के पास सूर्यलोक में निवास करने की शक्ति है और वे स्वयं सूर्य देव को ऊर्जा और दिशा प्रदान करती हैं। उन्हें लाल रंग के पुष्प बेहद प्रिय हैं।

चौथे दिन क्या भोग लगाएं

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को प्रसन्न करने के लिए विशेष भोग लगाने का महत्व है। देवी मां को मालपुआ और पेठा अत्यंत प्रिय है। भक्तजनों को इस दिन माता के समक्ष मालपुआ और पेठा अर्पित करना चाहिए। यदि संभव हो, तो केसरिया पेठे का भोग लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। साथ ही, परंपरा के अनुसार मां को पेठे की बलि चढ़ाने का भी विधान है।

भोग अर्पित करते समय जरूरी सावधानियां

मां कूष्मांडा की पूजा और भोग तैयार करते समय स्वच्छता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। भोग बनाते समय यह सुनिश्चित करें कि उसमें लहसुन, प्याज या किसी भी तामसिक सामग्री का उपयोग न हुआ हो। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि माता दुर्गा की पूजा में तुलसी का प्रयोग करना वर्जित है, इसलिए उनके भोग में तुलसी न डालें। मालपुआ हमेशा शुद्ध देसी घी में ही तैयार करें और पूरी निष्ठा के साथ माता के चरणों में समर्पित करें। यदि मालपुआ और पेठा उपलब्ध न हो, तो आप विकल्प के तौर पर माता को बताशे का भोग भी अर्पित कर सकते हैं।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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