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2 घंटे पहले
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प्रशासनिक गलियारों से सियासी मैदान तक
भारतीय राजनीति के बदलते परिदृश्य में कई बार ऐसे चेहरे सामने आते हैं जो लीक से हटकर अपनी एक अलग लकीर खींचते हैं। असम की राजनीति में आजकल एक नाम काफी चर्चा में है, जो प्रशासनिक महकमे का एक अनुभवी चेहरा रहा है और अब चुनावी राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार है। हम बात कर रहे हैं देबाशीष शर्मा की। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें असम की नौगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है। यह चुनावी सीट कांग्रेस के नेता प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी, जिसके बाद से ही यहाँ का सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल गया है।
वीआरएस लेकर राजनीति की राह
देबाशीष शर्मा ने हाल ही में जिला कमिश्नर के पद पर रहते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS लेने का बड़ा फैसला किया। अपनी सरकारी जिम्मेदारियों से मुक्त होने के बाद, 8 सितंबर को उन्होंने गुवाहाटी स्थित भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ली। एक सफल प्रशासनिक करियर को पीछे छोड़कर सीधे जनता के बीच चुनावी अखाड़े में उतरने के उनके इस फैसले ने हर किसी को हैरान कर दिया है। अब लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर फाइलों और सरकारी आदेशों के बीच तीन दशक गुजारने वाले देबाशीष शर्मा की वास्तविक पृष्ठभूमि क्या है और उनका सफर कैसा रहा है।
शिक्षा और करियर की शुरुआत
किसी भी व्यक्ति की वैचारिक गहराई उसके शैक्षणिक अनुभवों से ही तय होती है। देबाशीष शर्मा का शुरुआती जीवन ज्ञान और साहित्य के सानिध्य में बीता। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया और उसके बाद पब्लिक रिलेशंस में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। साल 1992 में उन्होंने असम सिविल सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण की और प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। उनकी करियर की पहली तैनाती बारपेटा जिले में हुई थी, जहां से उन्होंने जनसेवा का अपना लंबा और बेदाग कार्यकाल शुरू किया था।
तीन दशकों का शानदार प्रशासनिक अनुभव
अपने करीब तीन दशक से भी अधिक के लंबे और प्रभावी करियर के दौरान, देबाशीष शर्मा ने कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण पदों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। वे असम के तत्कालीन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल SK Sinha के विशेष अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने मुंबई में स्थित असम भवन में डिप्टी रेजिडेंट कमिश्नर के पद पर कार्य करते हुए अन्य राज्यों में असम का प्रतिनिधित्व करने की अहम भूमिका भी निभाई। उनकी प्रशासनिक दक्षता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे गुवाहाटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के कमिश्नर भी रह चुके हैं। नौगांव में VRS लेने से पहले उन्होंने मोरीगांव जिले के कमिश्नर के रूप में भी कमान संभाली थी।
संगीत के शौकीन और सोशल मीडिया पर छाए अधिकारी
देबाशीष शर्मा की शख्सियत का एक ऐसा दिलचस्प पहलू भी है जो उन्हें अन्य नौकरशाहों से बिल्कुल अलग खड़ा करता है। वे केवल सरकारी फाइलों के बीच उलझे रहने वाले अफसर नहीं हैं, बल्कि संगीत के प्रति गहरे लगाव रखने वाले व्यक्ति हैं। वे अक्सर सार्वजनिक मंचों पर गिटार बजाते देखे जा सकते हैं। उनका यह हुनर वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दुनिया के सामने तब आया, जब दूसरे चरण के मतदान के बाद वे मोरीगांव में ईवीएम के साथ स्ट्रॉन्ग रूम पहुंचे। वहां उन्होंने कड़ी मेहनत कर रहे मतदान कर्मियों का तनाव कम करने के लिए गिटार बजाया और गीत गाए। उनके इस अनोखे और मानवीय अंदाज के वीडियो सोशल मीडिया पर बेहद वायरल हुए थे।
समाज सेवा और दीपशिखा का मिशन
प्रशासनिक सेवा के भारी दबाव के बावजूद, देबाशीष शर्मा ने कभी भी मानवता और समाज सेवा का दामन नहीं छोड़ा। वे कैंसर रोगियों की देखभाल के लिए समर्पित मशहूर संस्था दीपशिखा के संस्थापक चेयरमैन और ट्रस्टी भी हैं। इस संस्था के माध्यम से वे पिछले काफी समय से असम और आसपास के क्षेत्रों में कैंसर से जूझ रहे रोगियों और उनके परिवारों को हर संभव मदद उपलब्ध कराते रहे हैं। सरकारी नौकरी को अलविदा कहने के बाद राजनीति के नए मंच पर अब वे जनता के बीच जा रहे हैं, जहां उनके बहुआयामी अनुभव का परीक्षण होना बाकी है।
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